Jaiprakash Power Ventures (JPVL) के लिए पिछला फाइनेंशियल ईयर (FY26) मुनाफे के लिहाज से काफी निराशाजनक रहा। कंपनी का नेट प्रॉफिट (Net Profit) पिछले साल के मुकाबले काफी गिर गया है। इस बीच, Adani Power ने JPVL में **24%** हिस्सेदारी खरीद ली है, जिससे यह अब Adani Power की एसोसिएट कंपनी बन गई है।
JPVL के मुनाफे में क्यों आई गिरावट?
Jaiprakash Power Ventures ने 31 मार्च 2026 को खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹441.52 करोड़ का टैक्स के बाद मुनाफा (Profit After Tax) दर्ज किया है। यह पिछले फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के ₹810.73 करोड़ के मुकाबले एक बड़ी गिरावट है। कंसॉलिडेटेड (Consolidated) आधार पर भी नेट प्रॉफिट घटकर ₹450.63 करोड़ रह गया, जो पिछले साल ₹813.55 करोड़ था।
हालांकि, कंपनी का स्टैंडअलोन नेट रेवेन्यू (Net Revenue) पिछले साल के ₹5462.16 करोड़ से बढ़कर ₹5563.44 करोड़ हो गया, लेकिन खर्चों में बढ़ोतरी और अन्य वजहों से मुनाफा काफी कम हो गया।
Adani Power की एंट्री और कोयला खदानों का सरेंडर
इस दौरान JPVL में एक बड़ा डेवलपमेंट हुआ है। Adani Power Limited (APL) ने Jaiprakash Associates Limited (JAL) से JPVL की 24% हिस्सेदारी खरीद ली है। इस डील के बाद JPVL अब Adani Power की एसोसिएट कंपनी (Associate Company) बन गई है।
इसके अलावा, कंपनी के बोर्ड ने पॉलिसी में बदलाव और इकोनॉमिक असेसमेंट के बाद अमेलिया (नॉर्थ) कोल माइन (Amelia (North) Coal Mine) और बांधा नॉर्थ कोल माइन (Bandha North Coal Mine) को सरेंडर करने का फैसला भी किया है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
रेवेन्यू में बढ़ोतरी के बावजूद मुनाफे में इतनी बड़ी गिरावट निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। वहीं, कंपनी के स्टैट्यूटरी ऑडिटर्स (Statutory Auditors) ने कुछ अहम अकाउंटिंग मामलों पर 'क्वालिफाइड ओपिनियन' (Qualified Opinion) दी है, जिसमें प्रोविजनिंग (Provisioning) में कमियां बताई गई हैं। इससे कंपनी के गवर्नेंस और फाइनेंशियल रिस्क पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
दूसरी तरफ, Adani Power के साथ नई स्ट्रैटेजिक एसोसिएशन (Strategic Association) से कंपनी को भविष्य में ऑपरेशनल सिनर्जी (Operational Synergies) और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी (Financial Stability) मिलने की उम्मीद है।
ऑडिटर्स की चिंताएं
ऑडिटर्स ने JAL के लिए कॉरपोरेट गारंटी (Corporate Guarantees) के अगेंस्ट नॉन-प्रोविजनिंग, एंट्री टैक्स डिमांड और ₹5696.51 करोड़ के बड़े रिकंपेंस क्लेम (Recompense Claim) जैसी चिंताओं पर प्रकाश डाला है। मैनेजमेंट का यह कहना कि इन बातों का मटेरियल (Material) या असर्टेनेबल (Ascertainable) प्रभाव नहीं पड़ेगा, इस पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत होगी। इन प्रोविजन से जुड़े लीगल और रेगुलेटरी चैलेंज (Legal and Regulatory Challenges) एक बड़ा रिस्क बने हुए हैं।
