गुजरात गैस अब बनी गुजरात एनर्जी, मर्जर के बाद बड़ा ऐलान
गुजरात गैस लिमिटेड अब गुजरात एनर्जी लिमिटेड के नाम से जानी जाएगी। यह बदलाव GSPC, GSPL और GSPC एनर्जी के मर्जर के बाद प्रभावी हुआ है, जो 1 मई, 2026 से लागू है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 (FY26) के लिए ₹2,299 करोड़ का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) दर्ज किया है और ₹8.90 प्रति शेयर के डिविडेंड की सिफारिश की है।
नतीजों का ब्यौरा
कंपनी ने FY26 के लिए ₹3,772 करोड़ का EBITDA और ₹2,299 करोड़ का PAT दर्ज किया। बोर्ड ने ₹8.90 प्रति शेयर के डिविडेंड भुगतान की सिफारिश की है, जिसका कुल भुगतान ₹835 करोड़ होगा। चौथी तिमाही (Q4 FY26) में EBITDA ₹943 करोड़ रहा। वहीं, CNG बिक्री की मात्रा रिकॉर्ड स्तर पर 3.6 mmscmd रही और PNG ग्राहकों की संख्या मार्च 2026 तक 24.18 लाख हो गई।
क्यों है यह अहम?
यह रीब्रांडिंग और मर्जर एक एकीकृत ऊर्जा कंपनी बनने की दिशा में एक बड़ी रणनीतिक पहल है। कंपनी डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और ग्राहक आधार बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिसका लक्ष्य शेयरधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य बनाना है। मैनेजमेंट ने नई इकाई के लिए रणनीति बनाने हेतु McKinsey को भी शामिल किया है।
मर्जर और डीमर्जर का असर
इस मर्जर से गैस ट्रेडिंग, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD), एक्सप्लोरेशन एंड प्रोडक्शन (E&P) और रिन्यूएबल्स जैसे विभिन्न ऊर्जा व्यवसायों का एकीकरण होगा, जिससे सिनर्जी और परिचालन दक्षता बढ़ने की उम्मीद है। कंपनी ने अपने गैस ट्रांसमिशन व्यवसाय को GTL में डीमर्ज कर दिया है, जिससे संचालन को और सुव्यवस्थित किया जा सके।
आगे की राह और जोखिम
गुजरात एनर्जी अब एक एकीकृत ऊर्जा कंपनी के रूप में काम करेगी। प्रमुख प्राथमिकताओं में एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ERP) सिस्टम का विस्तार, बेहतर निर्णय लेने के लिए AI-एनेबल्ड एनालिटिक्स लागू करना और सभी सेगमेंट में ग्राहक आधार बढ़ाना शामिल है। हालांकि, भू-राजनीतिक अस्थिरता, खासकर मध्य पूर्व में, गैस सोर्सिंग और बाजार में अस्थिरता पैदा कर सकती है। इसके अलावा, विलय और डीमर्जर प्रक्रिया के कारण ऐतिहासिक डेटा की तुलना करते समय सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी।
