Fujiyama Power Systems ने अपनी सहयोगी कंपनी Zayo Energy Private Limited में **₹5.01 करोड़** का निवेश किया है। कंपनी ने इसके लिए **833** कंपलसरी कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (CCDs) सब्सक्राइब किए हैं, जिसका मकसद सोलर कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग में बैकवर्ड इंटीग्रेशन को बढ़ावा देना है।
निवेश की पूरी जानकारी
Fujiyama Power Systems Limited ने अपनी 50% हिस्सेदारी वाली सहयोगी कंपनी ZEPL में ₹5,00,57,469 का फंड लगाने का फैसला किया है। इसके बदले कंपनी को 833 CCDs मिलेंगे, जहां हर डिबेंचर की वैल्यू ₹60,093 (इसमें ₹10 फेस वैल्यू और ₹60,083 प्रीमियम शामिल है) तय की गई है। पूरी प्रक्रिया को 60 दिनों के भीतर पूरा किया जाएगा।
क्यों लिया यह बड़ा फैसला?
कंपनी अपनी सोलर सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए 'बैकवर्ड इंटीग्रेशन' की रणनीति पर काम कर रही है। इस निवेश से कंपनी सोलर के जरूरी पुर्जों जैसे PV रिबन वायर, बसबार, कॉपर वायर और एल्युमीनियम फ्रेम का खुद मैन्युफैक्चरिंग बेस तैयार करना चाहती है।
निवेशकों के लिए जोखिम (Risks)
सावधान रहने वाली बात यह है कि Zayo Energy फिलहाल 'प्री-रेवेन्यू' स्टेज पर है और फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में इसका टर्नओवर शून्य रहा है। कंपनी ने अभी तक कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू नहीं किया है। इस निवेश की सफलता पूरी तरह से इस पर टिकी है कि ZEPL कितनी जल्दी अपने प्रोजेक्ट को कमर्शियल प्रोडक्शन में बदल पाती है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर में कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन भविष्य में जब ये डिबेंचर्स इक्विटी में बदलेंगे, तब हिस्सेदारी के गणित में बदलाव आ सकता है। निवेशकों को अब कंपनी के कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होने की टाइमलाइन पर नजर रखनी चाहिए।
