Bharat Petroleum Corporation Ltd (BPCL) के लिए चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही चुनौतियों भरी रही। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कम मार्केटिंग मार्जिन के चलते कंपनी को **₹3,962 करोड़** का नेट लॉस उठाना पड़ा है।
मुनाफे से नुकसान तक का सफर
BPCL के लिए पिछला फाइनेंशियल ईयर ₹25,843 करोड़ के शानदार मुनाफे के साथ खत्म हुआ था, लेकिन इस बार तस्वीर बदली हुई नजर आ रही है। कंपनी का मानना है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के बंद होने के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिसका सीधा असर कंपनी की बैलेंस शीट पर पड़ा है। इसके अलावा, महंगाई के दौर में आम जनता को राहत देने के लिए कंपनी ने अपने मार्केटिंग मार्जिन को भी काफी सीमित रखा था।
इनवेस्टर्स के लिए क्या है खास?
बीते साल 116.6% की कैपेसिटी यूटिलाइजेशन और $11.74 प्रति बैरल का ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन दर्ज करने वाली BPCL, फिलहाल ग्लोबल सप्लाई चेन में आ रही बाधाओं से जूझ रही है। बाजार की नजर इस बात पर है कि क्या कंपनी अपनी इंटरनल एफिशिएंसी से इस घाटे की भरपाई कर पाएगी या नहीं।
'Project Aspire': लंबी दौड़ की तैयारी
नुकसान के बावजूद, कंपनी अपने बड़े विजन 'Project Aspire' पर पूरी मजबूती से काम कर रही है:
- Mumbai Refinery: यहाँ ₹14,000 करोड़ का निवेश किया जा रहा है ताकि हाई-सल्फर क्रूड को आसानी से प्रोसेस किया जा सके।
- विस्तार की रणनीति: कोच्चि और बीना रिफाइनरी की क्षमता बढ़ाई जा रही है और पेट्रोकेमिकल यूनिट्स को इंटीग्रेट किया जा रहा है।
- ग्रीन एनर्जी: बीना में ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट और CBG ब्लेंडिंग पर कंपनी का खास जोर है।
हालांकि, मिडिल ईस्ट की अस्थिरता आने वाले समय में भी क्रूड प्रोक्योरमेंट कॉस्ट (Procurement Cost) को प्रभावित कर सकती है। अब निवेशकों की नजरें बीना और कोच्चि रिफाइनरी अपग्रेड्स की डेडलाइन्स और रामायपट्टनम रिफाइनरी प्रोजेक्ट की प्रोग्रेस पर टिकी होंगी।
