सरकारी कंपनी BPCL पर BSE और NSE ने कुल **₹29.34 लाख** का जुर्माना लगाया है। बोर्ड में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की कमी के कारण यह कार्रवाई की गई है, जिसके लिए कंपनी ने सरकारी नियुक्तियों में देरी का हवाला दिया है।
जुर्माना क्यों लगा?
BSE और NSE ने प्रत्येक एक्सचेंज पर ₹14.67 लाख का फाइन लगाया है, जो कुल मिलाकर ₹29.34 लाख होता है। यह पेनाल्टी SEBI के LODR नियमों के उल्लंघन के चलते लगाई गई है, जिसमें बोर्ड और कमिटी (Audit & Nomination) के स्ट्रक्चर को मेंटेन करना अनिवार्य होता है।
कंपनी का क्या है पक्ष?
BPCL ने साफ किया है कि इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की नियुक्ति उसके हाथ में नहीं है, क्योंकि यह एक सरकारी उपक्रम (PSU) है। नियुक्तियों का फैसला केंद्र सरकार लेती है। कंपनी का कहना है कि वे इस स्थिति को लेकर एक्सचेंजों से जुर्माने को माफ करने (Waiver) की औपचारिक अपील करेंगे, क्योंकि इसमें कंपनी का सीधा नियंत्रण नहीं है।
क्या ऑपरेशंस पर होगा असर?
कंपनी के मुताबिक, इस जुर्माने या बोर्ड में डायरेक्टर्स की कमी का कंपनी के डेली ऑपरेशंस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जैसे ही सरकार की ओर से नॉमिनेशन आएंगे, बोर्ड और कमिटी का स्ट्रक्चर फिर से पूरा कर लिया जाएगा।
