Asian Energy Services की होल्डिंग कंपनी Oilmax Energy को सरकार से एक बड़ा हाइड्रोकार्बन कॉन्ट्रैक्ट मिला है। दोनों कंपनियों का मर्जर NCLT की मंजूरी के दौर में है, जिसके बाद ये एसेट्स Asian Energy Services के पोर्टफोलियो का हिस्सा बन जाएंगे।
Oilmax Energy ने हासिल की बड़ी कामयाबी
भारत सरकार ने Oilmax Energy Private Limited को हाइड्रोकार्बन कॉन्ट्रैक्ट एरिया GK/OSDSF/GKOSN/2025 आवंटित किया है। इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत कंपनी को 50% पार्टिसिपेटिंग इंटरेस्ट और ऑपरेटर का दर्जा मिला है। हालांकि, अभी सरकार के साथ एक फॉर्मल रेवेन्यू शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर होना बाकी है।
डील का महत्व
हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (Directorate General of Hydrocarbons) ने 31 अगस्त, 2026 को Oilmax Energy को लेटर ऑफ अवॉर्ड जारी किया। यह जीत न केवल कंपनी के लिए रणनीतिक रूप से अहम है, बल्कि यह Asian Energy Services के लिए भी एक बड़ी खबर है क्योंकि दोनों कंपनियां फिलहाल एक कोर्ट-स्वीकृत मर्जर की प्रक्रिया से गुजर रही हैं।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
एक बार NCLT की अंतिम सुनवाई पूरी होने और मर्जर की योजना प्रभावी होने के बाद, Asian Energy Services उन सभी कॉन्ट्रैक्ट्स और लाइसेंसों की मालिक बन जाएगी जो अभी Oilmax के पास हैं। अब पूरी नजर NCLT की कार्यवाही पर है, क्योंकि यही वह कानूनी कड़ी है जो इन नए एसेट्स को Asian Energy Services की बैलेंस शीट में जोड़ेगी।
क्या रखें ध्यान?
निवेशकों को यह समझना होगा कि यह कॉन्ट्रैक्ट अवॉर्ड भारत के राष्ट्रपति के साथ एक औपचारिक रेवेन्यू शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट के निष्पादन के अधीन है। साथ ही, यदि NCLT मर्जर की प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी होती है, तो इसका असर इन एसेट्स के ट्रांसफर टाइमलाइन पर पड़ सकता है।
