Wardwizard Foods ने FY26 में दर्ज किया मुनाफा, लेकिन ऑडिटर की रिपोर्ट ने बढ़ाई मुश्किलें
Wardwizard Foods and Beverages Limited ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर में घाटे से उबरकर मुनाफा कमाया है। कंपनी ने ₹1.31 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जबकि पिछले साल FY25 में ₹13.69 करोड़ का घाटा था। वहीं, कंपनी के ऑपरेशंस से रेवेन्यू में 156% का जोरदार उछाल देखने को मिला और यह ₹237.73 करोड़ पर पहुंच गया।
क्या हुआ?
Wardwizard Foods ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त तिमाही और पूरे फाइनेंशियल ईयर के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी FY25 के नेट लॉस से निकलकर FY26 में ₹1.31 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाने में सफल रही। FY26 के लिए कंपनी का कुल रेवेन्यू ₹237.73 करोड़ रहा, जो FY25 के ₹92.78 करोड़ की तुलना में काफी ज्यादा है। FY26 की चौथी तिमाही में कंपनी ने ₹40.45 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹2.99 करोड़ का प्रॉफिट दर्ज किया।
निवेशकों के लिए क्यों खास?
लगातार घाटे के बाद मुनाफे में आना शेयरहोल्डर्स के लिए बड़ी राहत की खबर है। रेवेन्यू में हुआ भारी इजाफा बिजनेस के बेहतर प्रदर्शन का संकेत देता है। हालांकि, ऑडिटर की 'क्वालिफाइड ओपिनियन' (Qualified Opinion) ने कंपनी की फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स की सटीकता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर एसेट वैल्यूएशन और बॉरोइंग्स को लेकर।
बैकस्टोरी
Wardwizard Foods अपनी फाइनेंशियल हेल्थ को सुधारने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। FY26 के नतीजे ऑपरेशनल लेवल पर एक मजबूत रिकवरी दिखाते हैं, जहां रेवेन्यू पिछले फाइनेंशियल ईयर के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा हुआ है। कंपनी ने आने वाले फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए एक इंटरनल ऑडिटर भी नियुक्त किया है।
अब क्या बदलेगा?
इन्वेस्टर्स को अब कंपनी के मैनेजमेंट से ऑडिटर की क्वालिफिकेशन्स को लेकर स्पष्टीकरण का इंतजार रहेगा। एसेट रिकवरी और अनवेरिफाइड बॉरोइंग्स पर मैनेजमेंट और ऑडिटर के बीच असहमति के चलते, ये मुद्दे आगे भी चर्चा का विषय बने रहेंगे और इन पर लगातार नजर रखनी होगी। कंपनी की इन चिंताओं को सफलतापूर्वक दूर करने की क्षमता ही निवेशक के भरोसे को मजबूत करेगी।
जोखिम क्या हैं?
क्वालिफाइड ऑडिट ओपिनियन सबसे बड़ा जोखिम है। इसमें मुख्य चिंताएं शामिल हैं:
- ऑडिटर का मानना है कि ₹7.60 करोड़ के 'अन्य करंट नॉन-फाइनेंशियल एसेट्स' (Other Current Non-Financial Assets) और ₹1.08 करोड़ के 'अन्य करंट फाइनेंशियल एसेट्स' (Other Current Financial Assets) की रिकवरी संभव नहीं है और इन्हें राइट-ऑफ (impair) किया जाना चाहिए।
- कुल ₹29.42 करोड़ की बॉरोइंग्स में से ₹3.28 करोड़ की बॉरोइंग्स इंडियन क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी से ली गई हैं, लेकिन लोन स्टेटमेंट उपलब्ध न होने के कारण इन्हें स्वतंत्र रूप से वेरिफाई नहीं किया जा सका।
- स्टैच्यूटरी ऑडिटर को Q4 की इंटरनल ऑडिट रिपोर्ट उपलब्ध नहीं थी।
आगे क्या देखना है?
इन्वेस्टर्स को मैनेजमेंट द्वारा ऑडिटर की चिंताओं, विशेष रूप से एसेट रिकवरी और बॉरोइंग्स के वेरिफिकेशन को दूर करने की दिशा में की जा रही प्रगति पर नज़र रखनी चाहिए। भविष्य के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स और ऑडिट रिपोर्ट्स यह तय करेंगी कि इन मुद्दों का समाधान हो पाता है या नहीं।
