Vikram Kamats Hospitality: रेवेन्यू बढ़ा, पर मुनाफे में भारी गिरावट! ₹1 करोड़ की वसूली पर नजर

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AuthorNeha Patil|Published at:
Vikram Kamats Hospitality: रेवेन्यू बढ़ा, पर मुनाफे में भारी गिरावट! ₹1 करोड़ की वसूली पर नजर
Overview

Vikram Kamats Hospitality ने FY26 के लिए शानदार **43.9%** रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है, जो ₹55.99 करोड़ रहा। हालाँकि, नेट प्रॉफिट में **78.3%** की भारी गिरावट आई है और यह सिर्फ **₹0.14 करोड़** रह गया। कंपनी एक टर्मिनेटेड लीज से ₹1 करोड़ की डिपॉजिट वापस पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही है।

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रेवेन्यू में बम्पर उछाल, पर प्रॉफिट में गोता!

Vikram Kamats Hospitality Limited ने अपने चौथी तिमाही और पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 के नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड एनुअल रेवेन्यू पिछले साल के ₹38.91 करोड़ के मुकाबले 43.9% बढ़कर ₹55.99 करोड़ हो गया। यह बिजनेस के लिए एक बड़ी पॉजिटिव खबर है।

मुनाफे में 78% से ज्यादा की गिरावट

लेकिन, कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 78.3% गिरकर सिर्फ ₹0.14 करोड़ रह गया, जो पिछले साल FY25 में ₹0.66 करोड़ था। हालाँकि, स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में सुधार देखने को मिला है, जो पिछले साल के ₹0.60 करोड़ से बढ़कर ₹2.14 करोड़ हो गया है।

क्यों घटी कंसोलिडेटेड प्रॉफिट?

रेवेन्यू में बढ़त के बावजूद कंसोलिडेटेड प्रॉफिट में गिरावट, कंपनी के ग्रुप लेवल पर बढ़ते खर्चों या किसी एक बार के बड़े खर्चों की ओर इशारा करती है। प्रॉफिट में गिरावट इन्वेस्टर्स के लिए चिंता का विषय बन सकती है।

कानूनी पचड़े में फंसी कंपनी

कंपनी एक टर्मिनेटेड लीज एग्रीमेंट को लेकर कानूनी मामले में फंसी हुई है। इसमें कंपनी ₹1 करोड़ की सिक्योरिटी डिपॉजिट और ₹1.25 करोड़ के डैमेजेस की रिकवरी की मांग कर रही है। कोर्ट की कार्यवाही 15 अक्टूबर 2026 तक रुकी हुई है। इसके अलावा, GST रेट्स में बदलाव के कारण ₹0.0344 करोड़ के GST इनपुट टैक्स क्रेडिट को राइट-ऑफ (write-off) कर दिया गया है।

मैनेजमेंट में बड़ा बदलाव

डॉ. विक्रम वी. कामत को 7 अक्टूबर 2026 से अगले तीन साल के लिए मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) के तौर पर फिर से नियुक्त किया गया है। इससे मैनेजमेंट में स्थिरता बनी रहेगी। M/s. Pipalia Singhal & Associates फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए इंटरनल ऑडिटर बने रहेंगे। कंपनी ने इक्विटी शेयर्स का प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट भी पूरा किया है और कुछ वारंट्स (warrants) की अवधि समाप्त हो गई है, जिनकी सब्सक्रिप्शन राशि जब्त कर ली गई है।

आगे क्या देखना होगा?

इन्वेस्टर्स की नजरें अब कंपनी की ₹1 करोड़ की सिक्योरिटी डिपॉजिट की रिकवरी पर टिकी होंगी। इस मामले में कोई भी देरी कंपनी की लिक्विडिटी (liquidity) को प्रभावित कर सकती है। साथ ही, रेवेन्यू ग्रोथ के बावजूद प्रॉफिट में आई भारी गिरावट, ऑपरेशनल एफिशिएंसी (operational efficiency) पर सवाल उठाती है। आने वाली तिमाहियों में कंपनी कैसा प्रदर्शन करती है, यह देखना अहम होगा।

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