Varun Beverages के निवेशकों की बल्ले-बल्ले! Q2 में रेवेन्यू ₹8,451 Cr पार, वॉल्यूम ग्रोथ **19.8%**

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AuthorAditya Rao|Published at:
Varun Beverages के निवेशकों की बल्ले-बल्ले! Q2 में रेवेन्यू ₹8,451 Cr पार, वॉल्यूम ग्रोथ **19.8%**

Varun Beverages ने Q2 2026 के लिए अपने नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी के रेवेन्यू (Revenue) में **20.4%** की शानदार सालाना बढ़ोतरी हुई है और यह **₹8,451.23 करोड़** पर पहुंच गया है। सेल्स वॉल्यूम में भी **19.8%** का जबरदस्त इजाफा देखने को मिला है। यह ग्रोथ भारत के साथ-साथ साउथ अफ्रीका में Twizza के अधिग्रहण के बाद इंटरनेशनल मार्केट्स में भी देखी गई। कंपनी ने PepsiCo के साथ अपने डील को **2049** तक बढ़ा दिया है और Asahi Group के साथ एक नया अलायंस भी किया है।

Detailed Coverage

Varun Beverages ने Q2 में मचाया धमाल, रेवेन्यू ₹8,451 Cr पार

Varun Beverages ने Q2 2026 के लिए अपने फाइनेंशियल नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने ₹8,451.23 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी तिमाही के ₹7,017.37 करोड़ की तुलना में 20.4% ज्यादा है। वहीं, EBITDA 17.2% बढ़कर ₹2,343.04 करोड़ और नेट प्रॉफिट (PAT) 15.1% बढ़कर ₹1,525.36 करोड़ रहा। कंपनी के कुल सेल्स वॉल्यूम में 19.8% की जबरदस्त सालाना बढ़ोतरी हुई और यह 466.7 मिलियन केस तक पहुंच गया।

ग्रोथ का डबल इंजन: इंडिया और इंटरनेशनल मार्केट्स

इस शानदार ग्रोथ की सबसे बड़ी वजह भारत में 14.4% की वॉल्यूम ग्रोथ रही, वहीं इंटरनेशनल मार्केट्स में तो जैसे तूफानी रफ्तार देखने को मिली, जहां वॉल्यूम ग्रोथ 38.4% रही। इस इंटरनेशनल बूस्ट में साउथ अफ्रीका में किए गए Twizza के अधिग्रहण का बड़ा हाथ है, जिसने 11.8 मिलियन केस का योगदान दिया।

स्ट्रैटेजिक डील्स से भविष्य को मजबूती

कंपनी ने अपने भविष्य को और मजबूत करने के लिए दो बड़े कदम उठाए हैं। सबसे पहले, PepsiCo के साथ अपना एक्सक्लूसिव बॉटलिंग और ट्रेडमार्क लाइसेंस एग्रीमेंट अप्रैल 2049 तक बढ़ा दिया गया है। इससे कंपनी को फ्यूचर में काफी फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी। दूसरे, Asahi Group के साथ एक अलायंस किया गया है, जिसके तहत 'CALPIS' ब्रांड को मार्केट में उतारा जाएगा। साथ ही, केन्या में एक अधिग्रहण भी किया गया है, जो ईस्ट अफ्रीका में कंपनी के विस्तार की ओर इशारा करता है।

मार्जिन पर दबाव और बढ़ते खर्च

हालांकि, इन सबके बीच एक चिंता की बात भी है। Twizza के लो-मार्जिन वाले बिजनेस के कंसॉलिडेशन के कारण EBITDA मार्जिन 76 बेसिस पॉइंट घटकर 27.7% पर आ गया है। इसके अलावा, नए प्लांट की शुरुआत और अधिग्रहण से जुड़े खर्चों के चलते डेप्रिसिएशन और फाइनेंस कॉस्ट में भी 33.6% और 55.8% की भारी बढ़ोतरी देखी गई है। ऐसे में, कंपनी के लिए इन खर्चों को मैनेज करना एक बड़ी चुनौती होगी।

आगे क्या देखना होगा?

अब निवेशकों की नजरें Twizza के इंटीग्रेशन और उसके ओवरऑल मार्जिन पर पड़ने वाले असर पर रहेंगी। 'CALPIS' ब्रांड की लॉन्चिंग और केन्या में विस्तार की सफलता भी कंपनी के फ्यूचर ग्रोथ के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। मैनेजमेंट का कॉस्ट इन्फ्लेशन और नए अधिग्रहण से जुड़े खर्चों को कंट्रोल करना देखना अहम होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.