Tahmar Enterprises Limited को महाराष्ट्र राज्य आबकारी विभाग से बड़ी राहत मिली है। कंपनी अब कोल्हापुर स्थित अपनी ग्रेन-बेस्ड डिस्टिलरी में IMFL बनाने का काम शुरू कर सकेगी।
बिजनेस में नया मोड़
Tahmar Enterprises Limited ने अपनी डिस्टिलरी में इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) बनाने की परमिशन हासिल कर ली है। यह मंजूरी फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए दी गई है। इस परमिशन के लिए कंपनी को ₹33.62 लाख की लाइसेंस फीस चुकानी होगी।
क्यों है यह अहम?
अब तक कंपनी केवल ग्रेन-बेस्ड स्पिरिट उत्पादन पर फोकस कर रही थी, लेकिन अब वह हाई-वैल्यू वाले IMFL सेगमेंट में एंट्री कर रही है। यह कंपनी के लिए अपनी मौजूदा डिस्टिलरी इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर इस्तेमाल करने का एक बड़ा मौका है।
आगे की राह
हालांकि सरकार की ओर से हरी झंडी मिल चुकी है, लेकिन कंपनी का असली इम्तिहान अब शुरू होगा। कंपनी को अब कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू करने के साथ-साथ मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क बनाना होगा। साथ ही, नियामक अनुपालन (Regulatory compliance) और लाइसेंस की शर्तों का कड़ाई से पालन करना होगा।
फिलहाल, कंपनी ने प्रोडक्शन की मात्रा या किसी ब्रांड लॉन्च के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी है। निवेशक अब नजर रखेंगे कि कंपनी कितनी जल्दी उत्पादन शुरू करती है और यह नया सेगमेंट कंपनी के मुनाफे में कब तक योगदान देना शुरू करता है।
