Stanley Lifestyles के निवेशकों के लिए बुरी खबर है। कंपनी ने Q1 FY27 में अपने कंसोलिडेटेड प्रॉफिट (consolidated profit) में भारी **91.64%** की गिरावट दर्ज की है, जो कि गिरकर महज **₹0.65 करोड़** रह गया है। इस गिरावट की एक बड़ी वजह कंपनी के सेक्रेटरी (Company Secretary) पर **₹3.34 करोड़** की हेराफेरी का आरोप है, जिसके बाद उन्हें टर्मिनेट (terminate) कर दिया गया है।
गवर्नेंस के मुद्दे ने बिगाड़े नतीजों का मजा
Stanley Lifestyles Limited (SLL) ने 30 जून, 2026 को समाप्त हुई तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे जारी किए हैं, जिसमें मुनाफा बुरी तरह गिरा है और कंपनी एक गंभीर कॉर्पोरेट गवर्नेंस (corporate governance) के मसले से जूझ रही है। कंपनी ने अपने कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर, मुकेश शर्मा, को 5 अगस्त, 2026 से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। उन पर कथित तौर पर फंड्स के दुरुपयोग और हेराफेरी का आरोप है।
क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?
इस गवर्नेंस मसले ने कंपनी के फाइनेंशियल नतीजों पर गहरा असर डाला है। कंसोलिडेटेड स्तर पर ₹334 लाख (₹3.34 करोड़) की हेराफेरी पाई गई है, जिसमें से ₹235 लाख को एक्सेप्शनल एक्सपेंस (exceptional expense) के तौर पर चार्ज किया गया है। वहीं, स्टैंडअलोन (standalone) स्तर पर ₹199 लाख (₹1.99 करोड़) की हेराफेरी हुई, जिसमें से ₹101 लाख को खर्च के तौर पर दिखाया गया है। इसी वजह से कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) पिछले साल की समान तिमाही के ₹7.78 करोड़ से लुढ़ककर ₹0.65 करोड़ पर आ गया, जो कि 91.64% की भारी गिरावट है। कंसोलिडेटेड रेवेन्यू (revenue) भी 8.57% घटकर ₹99.35 करोड़ रहा।
क्या है पूरा मामला?
कंपनी ने बताया है कि उसने इन फंड्स की रिकवरी (recovery) के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मुकेश शर्मा की बर्खास्तगी कंपनी की कंप्लायंस और गवर्नेंस स्ट्रक्चर में एक अहम मोड़ है।
अब क्या बदलेगा?
Stanley Lifestyles ने सुधीर अय्यर को अपना नया चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) नियुक्त किया है। श्री अय्यर के पास 20 साल से ज्यादा का अनुभव है और वह पहले Revathi Equipment Limited और Arvind Lifestyle Brands Ltd. जैसी कंपनियों में काम कर चुके हैं। इस नियुक्ति का मकसद फाइनेंस डिपार्टमेंट को मजबूत करना है। कंपनी फंड रिकवरी के लिए कानूनी रास्ते पर आगे बढ़ रही है।
आगे क्या देखना होगा?
मुख्य जोखिम कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़ा है। हेराफेरी की पूरी रकम और उसे वापस पाने की प्रक्रिया कितनी सफल होती है, यह देखना अहम होगा। रेवेन्यू और मुनाफे में आई गिरावट, एक्सेप्शनल चार्जेज के कारण और भी बढ़ गई है, जो कंपनी के लिए लगातार फाइनेंशियल चुनौतियां पेश कर रही है। निवेशक कंपनी के इंटरनल कंट्रोल (internal control) में सुधार पर बारीकी से नजर रखेंगे।
तिमाही के अहम आंकड़े:
- Q1 FY27 में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹99.35 करोड़ रहा, जो Q1 FY26 के ₹108.67 करोड़ से कम है।
- Q1 FY27 में कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) ₹0.65 करोड़ रहा, जो Q1 FY26 के ₹7.78 करोड़ से काफी कम है।
- स्टैंडअलोन प्रॉफिट पिछले साल के ₹5.84 करोड़ से घटकर ₹3.85 करोड़ रह गया।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
निवेशकों को फंड रिकवरी के लिए चल रही कानूनी कार्यवाही की प्रगति पर नजर रखनी चाहिए। साथ ही, इंटरनल कंट्रोल को बेहतर बनाने के लिए कंपनी द्वारा उठाए जा रहे कदमों और नए CFO के नेतृत्व में कंपनी के फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर भी ध्यान देना होगा। इन गवर्नेंस चिंताओं के बीच कंपनी का निवेशकों का विश्वास फिर से जीतना महत्वपूर्ण होगा।
