Som Distilleries ने मध्य प्रदेश (MP) प्लांट के बंद होने से हुए भारी नुकसान के बावजूद, उत्तर प्रदेश (UP) में अपना नया प्लांट शुरू कर दिया है। कंपनी ने FY27 के लिए ₹1,000-1,100 करोड़ के रेवेन्यू का लक्ष्य बरकरार रखा है।
Som Distilleries ने उत्तर प्रदेश में अपना नया प्लांट शुरू किया, मध्य प्रदेश प्लांट का निलंबन जारी
Som Distilleries & Breweries Ltd. ने पहली तिमाही (Q1 FY27) में ₹268.8 करोड़ की कुल आय और ₹15.2 करोड़ का EBITDA दर्ज किया है। कंपनी ने उत्तर प्रदेश में अपनी नई शराब भठ्ठी (brewery) को सफलतापूर्वक शुरू कर दिया है।
क्या हुआ?
Som Distilleries & Breweries Ltd. ने उत्तर प्रदेश में अपनी नई शराब भठ्ठी चालू कर दी है। यह कंपनी के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, खासकर तब जब मध्य प्रदेश (भोपाल) स्थित उनका प्लांट पिछले छह महीनों से बंद है। इस बंदी की वजह से कंपनी को अनुमानित ₹250-260 करोड़ का रेवेन्यू लॉस हुआ है। इतना ही नहीं, इस प्लांट के बंद रहने से कंपनी पर हर तिमाही लगभग ₹6-7 करोड़ का फिक्स्ड कॉस्ट का बोझ भी पड़ रहा है।
यह क्यों मायने रखता है?
उत्तर प्रदेश में शुरू हुई नई शराब भठ्ठी की सालाना क्षमता 10 मिलियन बीयर केस है, जो उत्तरी भारत में कंपनी के विस्तार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। पहले चरण में इस पर ₹300 करोड़ का निवेश किया गया है। हालांकि, भोपाल प्लांट का लगातार बंद रहना कंपनी की कमाई और मुनाफे पर सीधा असर डाल रहा है, जिससे कंपनी के प्रदर्शन में एक तरह का विरोधाभास दिख रहा है।
पूरी कहानी
मध्य प्रदेश प्लांट को लाइसेंसिंग मुद्दों के कारण निलंबित किया गया है, जो मामला फिलहाल अदालत में है। कंपनी पिछले आधे साल से इस प्लांट के बिना ही काम कर रही है। दूसरी ओर, यूपी प्लांट का शुरू होना एक रणनीतिक कदम है, जिसका मकसद एक प्रमुख क्षेत्र में उत्पादन और मार्केटिंग क्षमताओं को मजबूत करना है।
अब क्या बदलेगा?
यूपी प्लांट से उत्तरी भारत के लिए एक प्रमुख उत्पादन और मार्केटिंग हब बनने की उम्मीद है। कंपनी ने FY27 के लिए ₹1,000-1,100 करोड़ के रेवेन्यू का लक्ष्य बनाए रखा है। इससे पता चलता है कि कंपनी अपनी पूरी रणनीति को लेकर आश्वस्त है, जिसमें अपने ब्रांड पोर्टफोलियो को बेहतर बनाना और सिंगल-माल्ट कैटेगरी में प्रवेश करना शामिल है।
जोखिम
सबसे बड़ा जोखिम मध्य प्रदेश प्लांट से जुड़े अनसुलझे रेगुलेटरी मुद्दे हैं, जिनके समाधान की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं है। इसके अलावा, कच्चे माल (कैन, माल्ट, बोतलें) की कीमतों में 7.5%-8% की सालाना वृद्धि के कारण कंपनी पर मार्जिन का दबाव है। साथ ही, आंध्र प्रदेश में बाजार में प्रवेश में देरी हुई है, जो अब सितंबर 2026 तक होने की उम्मीद है।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को मध्य प्रदेश लाइसेंस की बहाली की प्रगति और नए शुरू हुए उत्तर प्रदेश प्लांट के प्रदर्शन पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। कच्चे माल की कीमतों के रुझान और कंपनी की ब्रांड रणनीति को लागू करने की क्षमता की निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी।
