Sheela Foam ने FY26 के लिए शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 11% बढ़कर ₹3,820.84 करोड़ रहा। साथ ही, कंपनी ने नेट डेट में ₹156 करोड़ की कमी की है और प्रति शेयर ₹1 के फाइनल डिविडेंड की सिफारिश की है। ये नतीजे Kurlon Enterprise Limited के सफल विलय को दर्शाते हैं।
Sheela Foam के FY26 के नतीजे: रेवेन्यू में 11% उछाल, ₹3,820 करोड़ पार, कर्ज भी घटा
- कंसोलिडेटेड रेवेन्यू (FY 2025-26): ₹3,820.84 करोड़ (पिछले साल से 11% ज़्यादा)
- कंसोलिडेटेड मुनाफा (FY 2025-26): ₹160.85 करोड़
निवेशकों के लिए खास
Sheela Foam Limited ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने ₹3,820.84 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 11% ज़्यादा है। इस दौरान कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹160.85 करोड़ रहा।
एक और अहम बात यह है कि कंपनी ने अपने नेट डेट (Net Debt) में ₹156 करोड़ की कटौती की है। अब कंपनी पर कुल ₹543 करोड़ का नेट डेट है, जिसका डेट-टू-EBITDA रेशियो 1.3x है। इसके अलावा, कंपनी के बोर्ड ने प्रति इक्विटी शेयर ₹1 (20%) के फाइनल डिविडेंड की भी सिफारिश की है, जिसे शेयरधारकों की मंजूरी मिलनी बाकी है।
क्यों अहम हैं ये नतीजे?
ये नतीजे Kurlon Enterprise Limited (KEL) के सफल विलय के बाद Sheela Foam की टॉप-लाइन (Revenue) और बॉटम-लाइन (Profit) दोनों में ग्रोथ की क्षमता को दिखाते हैं। डेट में कमी से कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ और ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार का पता चलता है। वहीं, डिविडेंड की सिफारिश मैनेजमेंट के कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी को लेकर बढ़े हुए भरोसे को जाहिर करती है।
विलय का असर
Kurlon Enterprise Limited का Sheela Foam Limited के साथ विलय, जिसे 'Pooling of Interest Method' के तहत अकाउंट किया गया है, ने वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी के ऑपरेशन के पैमाने को काफी बढ़ाया है। यह इंटीग्रेशन ही इस रिपोर्टेड ग्रोथ का मुख्य कारण माना जा रहा है। Sheela Foam भारत में फोम प्रोडक्ट्स, जैसे गद्दे, कम्फर्ट फोम और टेक्निकल फोम बनाने वाली एक लीडिंग कंपनी है।
आगे क्या?
Kurlon के सफल इंटीग्रेशन के बाद, Sheela Foam अब बड़े पैमाने पर काम कर रही है। निवेशक कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ और मार्जिन मैनेजमेंट को करीब से देखेंगे। कंपनी का फोकस संभवतः ऑपरेशंस को बेहतर बनाने और एक्वायर्ड एसेट्स को इंटीग्रेट करने पर रहेगा।
जोखिम जिन पर नज़र रखें
मैनेजमेंट ने कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता, सप्लाई चेन में रुकावटों और क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसे जोखिमों के बारे में आगाह किया है। इसके अलावा, GST, इनकम टैक्स और सेल्स टैक्स से जुड़े कई टैक्स विवाद अभी भी अथॉरिटीज के सामने लंबित हैं, जो संभावित कंटिंजेंट लायबिलिटी (contingent liabilities) पेश कर सकते हैं।
