Shanti Gold International ने पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी के रेवेन्यू में पिछले साल के मुकाबले 144.69% का जबरदस्त उछाल आया और यह ₹716.38 करोड़ पर पहुंच गया। वहीं, कंपनी के नेट प्रॉफिट में 46.94% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹50.48 करोड़ रहा। इसके साथ ही, कंपनी ने ₹100 करोड़ के राइट्स इश्यू (Rights Issue) को भी मंजूरी दे दी है, जिसका इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल और इन्वेंट्री की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा।
शानदार नतीजों का जश्न
Shanti Gold International Ltd ने 30 जून, 2026 को समाप्त हुई पहली तिमाही के लिए अपने वित्तीय नतीजे पेश किए हैं। इस अवधि में कंपनी के रेवेन्यू ने पिछले साल की इसी अवधि के ₹292.78 करोड़ के मुकाबले 144.69% की छलांग लगाते हुए ₹716.38 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया।
प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में भी 46.94% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो पिछले साल के ₹34.36 करोड़ से बढ़कर ₹50.48 करोड़ हो गया। कंपनी का EBITDA ₹71.45 करोड़ रहा।
कंपनी की नई मारोल (Marol) फैसिलिटी ने भी प्रोडक्शन शुरू कर दिया है, जो इस ग्रोथ में अहम भूमिका निभा रही है।
नतीजों का महत्व
रेवेन्यू में इतनी बड़ी बढ़ोतरी कंपनी की मजबूत मार्केट डिमांड और प्रोडक्शन कैपेसिटी के सफल इस्तेमाल को दर्शाती है। मारोल और जयपुर में नई फैसिलिटी की शुरुआत भविष्य में वॉल्यूम बढ़ाने की ओर इशारा कर रही है। वहीं, ₹100 करोड़ का राइट्स इश्यू इस विस्तार योजना को सपोर्ट करने के लिए वर्किंग कैपिटल और इन्वेंट्री की जरूरतों को पूरा करेगा, जिससे कंपनी की वित्तीय मजबूती बढ़ेगी।
कंपनी की रणनीति
Shanti Gold International अपनी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी और प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को लगातार मजबूत कर रही है। कंपनी का मुख्य फोकस स्टडेड ज्वैलरी पर है, जो उसके रेवेन्यू का लगभग 75% हिस्सा है। कंपनी का लक्ष्य फाइनेंशियल ईयर 2027 तक अपने रेवेन्यू को ₹3,500 करोड़ तक ले जाना है।
आगे क्या?
मारोल फैसिलिटी के चालू होने और जयपुर फैसिलिटी के नवंबर-दिसंबर 2026 तक शुरू होने की उम्मीद के साथ, कंपनी बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बेहतर स्थिति में है। राइट्स इश्यू से मिलने वाला पैसा कंपनी को इन्वेंट्री और वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा।
जोखिम पर नजर
निवेशकों को कंपनी के EBITDA मार्जिन पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। हाल ही में वैल्यूएशन के तरीके में बदलाव के कारण 2-2.5% का एक बार का इन्वेंट्री गेन शामिल था। उम्मीद है कि सामान्य मार्जिन 7.5%-8% के आसपास रहेगा। वहीं, इन्वेंट्री की उच्च वहन लागत जो ऑपरेशनल कैश फ्लो को प्रभावित कर सकती है, और कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio), जो वर्तमान में 0.50 है, पर भी ध्यान देना होगा।
भविष्य की राह
निवेशकों को EBITDA मार्जिन के सामान्य होने, राइट्स इश्यू से जुटाई गई राशि का प्रभावी इस्तेमाल, वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट और जयपुर की नई फैसिलिटी के संचालन पर नजर रखनी चाहिए।
