Sapphire Foods ने कोविड के बाद के दौर में अपना सबसे बेहतरीन तिमाही प्रदर्शन किया है। कंपनी की इस रफ्तार के पीछे KFC इंडिया की **26%** की जबरदस्त रेवेन्यू ग्रोथ है। हालांकि कंपनी का कंसोलिडेटेड EBITDA **21%** बढ़ा है, लेकिन निवेशकों को Pizza Hut और श्रीलंकाई ऑपरेशन्स में बढ़ते दबाव पर नजर रखनी चाहिए।
जोरदार नतीजों की झलक
कंपनी ने बीते 16 क्वार्टर्स में अपना सबसे दमदार प्रदर्शन किया है। रेस्तरां सेल्स में साल-दर-साल 20% का उछाल आया है, जो बढ़कर ₹8,853 मिलियन तक पहुंच गई है। वहीं, एडजस्टेड EBITDA में 39% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो ₹624 मिलियन हो गया है। कंपनी का कंसोलिडेटेड EBITDA ₹1,286 मिलियन रहा और मार्जिन 14.5% पर स्थिर बना हुआ है।
क्यों खास हैं ये नतीजे?
Sapphire Foods की 'एवरीडे वैल्यू' स्ट्रैटेजी काम कर रही है। KFC इंडिया में 14% की सेम-स्टोर सेल्स ग्रोथ (SSSG) ने साबित किया है कि ₹99 वाले 'क्रिसपर बर्गर मील' जैसे वैल्यू ऑफर्स के दम पर कंज्यूमर डिमांड अब भी बरकरार है। महंगाई के बावजूद KFC सेगमेंट में मार्जिन 70 bps बढ़ा है, जो कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी को दर्शाता है।
सेगमेंट के हाल
- KFC इंडिया: कंपनी का सबसे मजबूत सितारा। यहाँ रेवेन्यू में 26% की उछाल दिखी है। डिजिटल एडॉप्शन पर फोकस है, जिसके चलते 80% से ज्यादा आउटलेट्स पर कियोस्क लग चुके हैं।
- Pizza Hut इंडिया: यहाँ स्थिति थोड़ी चुनौतीपूर्ण है। रेवेन्यू 7% बढ़ा है और SSSG 5% रही, जो पिछले 7 क्वार्टर्स में सबसे ज्यादा है। हालांकि, एनर्जी कॉस्ट बढ़ने से EBITDA मार्जिन 100 bps गिरकर नेगेटिव 2.8% पर आ गया है।
- श्रीलंका: यहाँ का मार्केट अभी भी दबाव में है। महंगाई और वेज (Wage) खर्चों के कारण EBITDA मार्जिन 290 bps घटकर 12.5% रह गया है।
ऑपरेशनल अपडेट और रिस्क
कंपनी ने इस तिमाही में 12 नए रेस्तरां जोड़े हैं, जिसके बाद कुल संख्या 1,086 हो गई है। निवेशकों को Pizza Hut के मार्जिन पर नजर रखनी होगी, क्योंकि प्रोमोशनल प्राइसिंग और इनपुट कॉस्ट के बीच तालमेल बिठाना कंपनी के लिए चुनौती बना हुआ है। इसके अलावा, श्रीलंका का मैक्रोइकोनॉमिक माहौल कंसोलिडेटेड प्रॉफिटेबिलिटी के लिए बड़ा रिस्क है।
