S Chand ने Q1 FY27 के नतीजे जारी किए हैं, जिसमें कंपनी का नेट लॉस बढ़कर ₹18.7 करोड़ हो गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹14.1 करोड़ था। हालांकि, कंपनी की नेट कैश पोजीशन ₹118.2 करोड़ पर मजबूत हुई है और डिजिटल बिजनेस में 53% की जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की गई है।
S Chand के Q1 FY27 के नतीजे
कंपनी का रेवेन्यू ₹114.5 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹102.6 करोड़ से 12% ज्यादा है। वहीं, कंपनी के डिजिटल बिजनेस ने 53% की जोरदार ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ दर्ज की है।
घाटा बढ़ने की वजह
इन सबके बावजूद, कंपनी को पहली तिमाही (Q1 FY27) में ₹18.7 करोड़ का नेट लॉस हुआ है, जो पिछले साल की इसी तिमाही के ₹14.1 करोड़ के लॉस से ज्यादा है। EBITDA में भी मामूली गिरावट आई है, जो ₹9.7 करोड़ के लॉस में पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह ₹9.1 करोड़ था।
क्यों है यह मायने रखता है
कंपनी के नतीजे मिले-जुले संकेत दे रहे हैं। एक तरफ रेवेन्यू और डिजिटल सेगमेंट में ग्रोथ बिजनेस के विस्तार और नए बदलावों को दर्शाती है, वहीं बढ़ता हुआ नेट लॉस मुनाफे को लेकर चिंता बढ़ा रहा है। हालांकि, ₹118.2 करोड़ की मजबूत नेट कैश पोजीशन कंपनी को वित्तीय सहारा दे रही है।
कंपनी की रणनीति
S Chand का फोकस अपने बिजनेस मॉडल को डिजिटल की ओर ले जाने और पारंपरिक प्रकाशन के साथ-साथ कंटेंट लाइसेंसिंग पर है। कंपनी ने FY27 के लिए 10%-15% रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान बरकरार रखा है। मैनेजमेंट का लक्ष्य नए करिकुलम जैसे 'New Mylestone' और 'Zen' के जरिए बिक्री बढ़ाना है। साथ ही, EBITDA मार्जिन को 17%-19% तक सुधारने पर भी कंपनी का ध्यान है। कंपनी कागज की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक जोखिमों जैसे खतरों को कम करने के लिए भी कदम उठा रही है।
निवेशकों के लिए जोखिम
बढ़ते रेवेन्यू के बावजूद नेट लॉस का बना रहना, भू-राजनीतिक जोखिमों का कलेक्शन साइकल पर असर और इनपुट लागतों (जैसे कागज) का बढ़ना, ये कुछ ऐसे जोखिम हैं जिन पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए। यह देखना अहम होगा कि कंपनी बढ़ी हुई लागतों को ग्राहकों पर कितना डाल पाती है और अपने बॉटम लाइन को कैसे सुधार पाती है।
