Modern Dairies Ltd ने सितंबर तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट बढ़कर **₹2.25 करोड़** हो गया है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह **₹1.69 करोड़** था। हालांकि, कंपनी पर **₹544.31 करोड़** के Milk Cess का कानूनी संकट अभी भी बरकरार है जो सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
मुनाफे में इजाफा, लेकिन रेवेन्यू पर दबाव
कंपनी ने 30 सितंबर, 2026 को समाप्त हुई तिमाही के लिए अपने अनऑडिटेड नतीजे घोषित किए हैं। जहां एक ओर ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ने के कारण बॉटम-लाइन में मजबूती दिखी है, वहीं दूसरी ओर रेवेन्यू में गिरावट चिंता का विषय है। कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू घटकर ₹74.39 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही में ₹81.96 करोड़ और जून तिमाही में ₹91.27 करोड़ था।
फाइनेंशियल्स पर एक नजर
मुनाफे के मोर्चे पर कंपनी ने बेहतर प्रदर्शन किया है। नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹2.25 करोड़ पहुंच गया है। इसके चलते कंपनी का बेसिक अर्निंग पर शेयर (EPS) भी पिछले साल के ₹0.64 से बढ़कर ₹0.76 पर आ गया है।
Milk Cess का कानूनी पेच
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती हरियाणा सरकार के साथ चल रहा Milk Cess का विवाद है। कंपनी पर कुल ₹544.31 करोड़ (ब्याज सहित) की मांग है। इस मामले में कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन दायर की है। कंपनी ने एहतियात के तौर पर अब तक सिर्फ ₹22.17 करोड़ का ही प्रावधान किया है, जिसमें से ₹9.91 करोड़ कोर्ट के निर्देशानुसार जमा किए जा चुके हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
बाजार के जानकारों का मानना है कि ₹544.31 करोड़ की डिमांड और केवल ₹22.17 करोड़ के प्रोविजन के बीच का बड़ा अंतर बैलेंस शीट के लिए बड़ा जोखिम है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाले समय में कंपनी के स्टॉक पर भारी दबाव बना सकता है।
