Jungle Camps India ने Q1 FY27 के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का रेवेन्यू जहां 12% बढ़कर **₹5.97 करोड़** हो गया, वहीं नेट प्रॉफिट (PAT) **58.4%** घटकर **₹0.47 करोड़** रह गया। ऐसा एक बड़े खर्च की वजह से हुआ है।
Jungle Camps India का Q1 FY27 प्रदर्शन
Jungle Camps India ने 30 जून 2026 को खत्म हुई पहली तिमाही (Q1 FY27) के लिए अपने वित्तीय नतीजे पेश किए हैं। कंपनी की आय (Revenue from operations) में पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 12% का इजाफा हुआ है, जो ₹5.35 करोड़ से बढ़कर ₹5.97 करोड़ हो गया है।
हालांकि, मुनाफे (Profit After Tax - PAT) पर बड़ी चोट लगी है। पिछले साल की पहली तिमाही में ₹1.13 करोड़ का PAT इस बार 58.4% घटकर सिर्फ ₹0.47 करोड़ रह गया। EBITDA में भी 7% की गिरावट देखी गई है।
क्यों आई मुनाफे में गिरावट?
रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद नेट प्रॉफिट में इतनी बड़ी गिरावट यह बताती है कि कंपनी को या तो मार्जिन पर दबाव झेलना पड़ रहा है या फिर कुछ एक बार के बड़े खर्चे (exceptional expenses) हुए हैं। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी होगा कि रेवेन्यू ग्रोथ कितनी टिकाऊ है और इन खर्चों का भविष्य की कमाई पर क्या असर पड़ेगा। कंपनी भले ही विस्तार योजनाओं पर फोकस कर रही हो, लेकिन छोटी अवधि की प्रॉफिटेबिलिटी पर नजर रखना अहम होगा।
कंपनी की विस्तार योजनाएं
Jungle Camps India फिलहाल 8 प्रॉपर्टीज का संचालन कर रही है और 4 नई प्रॉपर्टीज पाइपलाइन में हैं। कंपनी IHG के साथ मिलकर मथुरा में होटल क्षमता का विस्तार कर रही है। साथ ही, शेओपुर फोर्ट हेरिटेज होटल पर काम शुरू हो गया है और 'पलाश कोठी' (Palash Kothi) का संचालन भी शुरू हो चुका है। इस तिमाही में रेगुलेटरी दिक्कतों के चलते 'पार्सिली' (Parsili) प्रोजेक्ट को बंद करना पड़ा है।
आगे क्या?
कंपनी ने बंद हुए पार्सिली प्रोजेक्ट से निकले फंड को अब शेओपुर फोर्ट प्रोजेक्ट में लगाया है। कंपनी का फोकस एसेट-लाइट ग्रोथ स्ट्रैटेजी और डेवलपमेंट पर है, ताकि अपनी पहुंच और ऑपरेशनल क्षमता को बढ़ाया जा सके।
जोखिम और आगे की राह
आगे चलकर रेगुलेटरी और पर्यावरणीय बाधाएं, डेवलपमेंट पाइपलाइन का समय पर पूरा होना और मार्जिन पर दबाव प्रमुख जोखिम हो सकते हैं। पार्सिली प्रोजेक्ट का रद्द होना बाहरी कारकों के प्रति कंपनी की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
परफॉरमेंस मेट्रिक्स
Q1 FY27 में कंपनी की औसत दैनिक दर (ADR) 5% बढ़कर ₹10,539 हो गई, जबकि ऑक्यूपेंसी (occupancy) 43% से बढ़कर 45% हो गई। रेवेन्यू पर उपलब्ध सीट (RevPAR) में 9% का इजाफा हुआ है। EBITDA मार्जिन घटकर 27% रह गया, जो पिछले साल 32% था।
