Jungle Camps India Ltd के लिए पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे चिंताजनक रहे। कंपनी का नेट प्रॉफिट **59%** घटकर सिर्फ **₹0.42 करोड़** रह गया। कंपनी पर ऑडिटर की नजरें हैं, जो जमीन खरीद विवाद और अधूरे प्रोजेक्ट्स पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं, IPO से जुटाए गए **₹9.71 करोड़** अभी तक इस्तेमाल नहीं हुए हैं।
Jungle Camps India Ltd के Q1 FY27 नतीजे
- Profit After Tax (PAT) Q1 FY27: ₹0.42 करोड़ (यानी 41.86 लाख)
- Profit After Tax (PAT) Q1 FY26: ₹1.03 करोड़ (यानी 103.13 लाख)
निवेशकों के लिए खास: प्रोजेक्ट्स पर हुए खर्च के कारण मुनाफे में भारी गिरावट आई है, और IPO के बड़े फंड अभी भी निवेश नहीं हुए हैं।
क्या हुआ?
Jungle Camps India Ltd ने 30 जून, 2026 को खत्म हुई तिमाही के लिए ₹0.42 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। पिछले साल की इसी तिमाही (30 जून, 2025) में कंपनी ने ₹1.03 करोड़ का प्रॉफिट कमाया था। यानी, कंपनी के मुनाफे में करीब 59% की भारी गिरावट आई है। हालांकि, ऑपरेशन्स से रेवेन्यू साल-दर-साल ₹5.35 करोड़ से बढ़कर ₹5.97 करोड़ हो गया है।
यह मायने क्यों रखता है?
मुनाफे में यह भारी गिरावट निवेशकों के लिए चिंता का विषय है, खासकर तब जब कंपनी को अपने ऑडिटर से भी सवालों का सामना करना पड़ रहा है। ऑडिटर ने 'Emphasis of Matter' के तहत कंपनी की जमीन खरीद में चल रहे विवाद और एक टूरिज्म प्रोजेक्ट को बंद करने के मुद्दे पर ध्यान दिलाया है, जिससे कंपनी को वित्तीय जोखिम हो सकता है।
पूरी कहानी
हाल ही में IPO लाने वाली Jungle Camps India Ltd रेवेन्यू में बढ़ोतरी के बावजूद मुश्किलों में घिरी नजर आ रही है। कंपनी के ऑडिटर, R. A. Kila & Co., ने दो मुख्य बातों पर गौर किया है। पहला, ₹1.88 करोड़ की जमीन की खरीद पर टाइटल डिस्प्यूट (जमीन के मालिकाना हक का विवाद) चल रहा है। इसमें से ₹1.34 करोड़ की रकम कोर्ट के आदेश पर फ्रीज होने के कारण वापस मिल गई है, लेकिन अंतिम नतीजा अभी भी अनिश्चित है। दूसरा, कंपनी ने मध्य प्रदेश में एक टूरिज्म प्रोजेक्ट को जरूरी मंजूरी न मिलने के कारण बंद कर दिया। इस प्रोजेक्ट पर ₹2.04 करोड़ खर्च हुए थे, जिसमें से ₹51.79 लाख का राइट-ऑफ (बट्टे खाते में डालना) किया गया है।
अब क्या बदलेगा?
निवेशक इस बात पर करीबी नजर रखेंगे कि कंपनी इस जमीन विवाद को कैसे सुलझाती है और बंद हुए प्रोजेक्ट के वित्तीय असर से कैसे निपटती है। इसके अलावा, IPO से जुटाए गए ₹9.71 करोड़ का बड़ा हिस्सा अभी भी फिक्स्ड डिपॉजिट में पड़ा है, जो कंपनी की विस्तार योजनाओं में देरी या बदलाव का संकेत देता है। शेयरहोल्डर्स ने पहले की मीटिंग्स में स्पेशल रेजोल्यूशन के जरिए IPO फंड के इस्तेमाल में बदलावों को मंजूरी दी थी।
जोखिम
मुख्य जोखिमों में जमीन खरीद विवाद का अनिश्चित नतीजा, बंद प्रोजेक्ट्स से और वित्तीय नुकसान की संभावना, और IPO फंड के इस्तेमाल में देरी शामिल है। निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए कंपनी को इन मुद्दों को सुलझाना होगा।
अहम आंकड़े (समय-सीमा के अनुसार)
- ऑपरेशन्स से रेवेन्यू (Q1 FY27): ₹5.97 करोड़ (Q1 FY26 में ₹5.35 करोड़ था)।
- कुल आय (Q1 FY27): ₹6.25 करोड़ (Q1 FY26 में ₹5.70 करोड़ थी)।
- अप्रयुक्त IPO फंड (30 जून, 2026 तक): ₹9.71 करोड़।
- बंद प्रोजेक्ट पर खर्च: ₹2.04 करोड़ का खर्च, ₹51.79 लाख राइट-ऑफ।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को जमीन विवाद के समाधान, मथुरा होटल प्रोजेक्ट पर प्रगति, और बचे हुए IPO फंड का उपयोग करने की कंपनी की रणनीति पर अपडेट्स पर नजर रखनी चाहिए। आने वाली तिमाहियों में कंपनी की मुनाफे में सुधार करने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी।
