ITC लिमिटेड ने Q1 FY27 के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का स्टैंडअलोन ग्रॉस रेवेन्यू 28.1% बढ़कर **₹26,794 करोड़** हो गया है। हालांकि, नेट रेवेन्यू में 14.4% की गिरावट आई और प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) **27.1%** घटकर **₹3,579 करोड़** पर आ गया।
ITC के Q1 FY27 नतीजे
₹26,794 करोड़ स्टैंडअलोन ग्रॉस रेवेन्यू; ₹3,579 करोड़ स्टैंडअलोन PAT
नतीजों का पूरा लेखा-जोखा
ITC लिमिटेड ने 30 जून, 2026 को समाप्त हुई पहली तिमाही (Q1 FY27) के अपने वित्तीय नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने 28.1% की जबरदस्त बढ़ोतरी के साथ ₹26,794 करोड़ का स्टैंडअलोन ग्रॉस रेवेन्यू दर्ज किया। लेकिन, बॉटम लाइन पर इसका असर उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। स्टैंडअलोन नेट रेवेन्यू 14.4% गिरकर ₹16,812 करोड़ रहा, जबकि स्टैंडअलोन प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 27.1% की गिरावट के साथ ₹3,579 करोड़ पर पहुंच गया।
कंसोलिडेटेड PAT में भी 15.6% की कमी आई और यह ₹4,509 करोड़ रहा। कंपनी के मैनेजमेंट ने नतीजों में इस उतार-चढ़ाव का मुख्य कारण सेगमेंट मिक्स, एग्री बिजनेस की अस्थिरता और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष जैसे बाहरी आर्थिक झटकों को बताया है।
क्यों मायने रखता है यह नतीजा?
यह नतीजे एक मिली-जुली तस्वीर पेश करते हैं, जो रेवेन्यू ग्रोथ के बावजूद मुनाफे पर बाहरी कारकों के प्रभाव को दर्शाते हैं। कंपनी के मुख्य FMCG बिजनेस, खासकर सिगरेट और अन्य FMCG कैटेगरी ने मजबूत प्रदर्शन किया, लेकिन एग्री बिजनेस की चुनौतियों और बढ़ती लागतों ने कुल वित्तीय नतीजों पर असर डाला। निवेशक इस बात पर बारीकी से नजर रख रहे हैं कि ITC अपनी 'ITC Next' रणनीति पर आगे बढ़ते हुए इन मैक्रो-इकोनॉमिक चुनौतियों का सामना कैसे करती है।
आगे क्या?
स्प्राउटलाइफ फूड्स (Sproutlife Foods) के अधिग्रहण के प्रभावी होने के बाद, जो 1 अप्रैल, 2026 से ITC की सहायक कंपनी बन गई है, कंपनी को फेयर वैल्यू री-मेजऱमेंट से ₹406 करोड़ का असाधारण लाभ मिला है। कंपनी इनपुट लागत की अस्थिरता को मैनेज करने के लिए इन्वेंटरी मैनेजमेंट और हेजिंग जैसी रणनीतियों को लागू करना जारी रखेगी। फोकस सभी बिजनेस सेगमेंट में ऑर्गेनिक ग्रोथ पर रहेगा, साथ ही बाजार की गतिशीलता और उपभोक्ता की मांग के अनुसार ढलना भी जारी रहेगा।
जोखिम के संकेत
मुख्य जोखिमों में पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न मैक्रोइकॉनोमिक अनिश्चितता शामिल है, जिसका ईंधन और खाद्य तेल जैसी इनपुट लागतों पर असर पड़ता है। मानसून की कमी और आयातित महंगाई जैसे कृषि संबंधी कारक भी चिंता का विषय हैं। इन लागत दबावों को मैनेज करने और व्यापार व्यवधानों के बीच एग्री बिजनेस के प्रदर्शन को बनाए रखने की कंपनी की क्षमता महत्वपूर्ण होगी।
