IFB Industries ने सितंबर 2026 तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू **22%** बढ़कर **₹1,676.78 करोड़** पर पहुंच गया है, लेकिन बढ़ते खर्चों के कारण नेट प्रॉफिट **₹38.34 करोड़** पर सिमट गया है।
रेवेन्यू और मुनाफे का गणित
सितंबर 2026 में खत्म हुई तिमाही के दौरान कंपनी की टॉप-लाइन परफॉर्मेंस काफी मजबूत रही है। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल के ₹1,370.43 करोड़ से बढ़कर ₹1,676.78 करोड़ हो गया है। हालांकि, बॉटम-लाइन पर इसका असर नहीं दिखा। कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल के ₹50.79 करोड़ से गिरकर ₹38.34 करोड़ रह गया है, जिसके चलते अर्निंग्स पर शेयर (EPS) भी ₹12.53 से घटकर ₹9.47 पर आ गया है।
क्यों दबाव में है कंपनी?
रेवेन्यू में 22% की ग्रोथ बताती है कि होम अप्लायंसेज और इंजीनियरिंग सेगमेंट में डिमांड तो अच्छी है, लेकिन ऑपरेशनल खर्चों और बढ़ती इनपुट कॉस्ट ने मार्जिन पर भारी दबाव डाल दिया है। अब देखना यह है कि कंपनी इस दबाव को कम करने के लिए क्या कदम उठाती है।
गवर्नेंस और आगे का रास्ता
कंपनी के बोर्ड ने 27 अक्टूबर 2026 को इन नतीजों को मंजूरी दी है। ऑडिट रिपोर्ट के लिए Price Waterhouse & Co Chartered Accountants LLP ने अपनी सहमति दी है। अब निवेशकों की नजर मैनेजमेंट की उस कमेंट्री पर होगी, जिसमें वे होम अप्लायंसेज, इंजीनियरिंग, मोटर्स और स्टील सेगमेंट में मार्जिन रिकवरी के लिए कोई ठोस योजना पेश करें।
