IFB Industries ने **FY26** में अब तक की सबसे ज़्यादा **₹5,652.59 करोड़** की रेवेन्यू और **₹351.23 करोड़** का PBDIT दर्ज किया है। हालांकि, ये नतीजे कंपनी के इंटरनल टारगेट से थोड़े कम रहे। कंपनी ने इस बार कोई डिविडेंड न देने का फैसला किया है, ताकि कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) और भविष्य के अधिग्रहण (Acquisitions) पर फोकस किया जा सके।
IFB Industries के नतीजे: कमाई में रिकॉर्ड, पर टारगेट से पीछे!
IFB Industries ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने कंसोलिडेटेड (Consolidated) आधार पर ₹5,652.59 करोड़ का अब तक का सबसे ज़्यादा रेवेन्यू और ₹351.23 करोड़ का PBDIT हासिल किया है। लेकिन, कुछ वजहों से ये नतीजे कंपनी के अपने टारगेट से थोड़े पीछे रह गए। इन वजहों में कंज्यूमर ड्यूरेबल (Consumer Durable) की मांग में कमी, रॉ मैटेरियल (Raw Material) की बढ़ती कीमतें और करेंसी (Currency) का उतार-चढ़ाव शामिल हैं।
क्या रहा खास?
FY25-26 में IFB Industries का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹5,652.59 करोड़ और PBDIT ₹351.23 करोड़ रहा। नेट प्रॉफिट (Profit After Tax - PAT) ₹143.56 करोड़ दर्ज किया गया। कंपनी ने साल का अंत सिर्फ ₹12.77 करोड़ के कर्ज और ₹358.97 करोड़ के मजबूत कैश बैलेंस के साथ किया, जिसका मतलब है कि कंपनी पर कोई नेट डेट (Net Debt) नहीं है।
कंपनी के इंजीनियरिंग डिविजन (Engineering Division) ने भी शानदार ग्रोथ दिखाई, जिसका रेवेन्यू 11.86% बढ़कर ₹934.20 करोड़ हो गया। हालांकि, इस डिविजन का PBDIT मार्जिन 16.21% से घटकर 14.84% रह गया। इसके पीछे Aftermarket सेगमेंट की दिक्कतें, बढ़े हुए स्टाफ खर्चे और नए एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स डिविजन (Advanced Electronics Division) की शुरुआती लागतें जिम्मेदार थीं।
डिविडेंड क्यों नहीं?
रिकॉर्ड रेवेन्यू के बावजूद, टारगेट से पीछे रहने से पता चलता है कि मैक्रो इकोनॉमिक (Macro Economic) फैक्टर कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी पर असर डाल रहे हैं। डिविडेंड न देने का फैसला यह दिखाता है कि कंपनी भविष्य के ग्रोथ एरिया और फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी (Financial Flexibility) में पैसा लगाना चाहती है। निवेशकों की नजरें इस बात पर रहेंगी कि कंपनी मार्जिन के दबाव को कैसे मैनेज करती है और अपने विस्तार की योजनाओं को कैसे पूरा करती है।
आगे क्या?
IFB Industries ने बैंगलोर में अपने एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स डिविजन के लिए नया प्लांट लगाया है और स्विट्जरलैंड में Schmid Automotive and Appliances GmbH को शामिल किया है ताकि टूलिंग क्षमताओं (Tooling Capabilities) को बढ़ाया जा सके। गुजरात के सानंद में स्टैंपिंग बिजनेस (Stamping Business) के विस्तार के लिए जमीन भी अधिग्रहित कर ली गई है। इन कदमों से कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग और रेवेन्यू स्ट्रीम को मजबूती मिलेगी।
जोखिम?
आगे चलकर कंपनी को पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक संघर्ष (Geopolitical Conflict) से जुड़े शिपिंग और कच्चे माल की लागत, और रुपये में लगातार गिरावट से मार्जिन पर पड़ने वाले असर का सामना करना पड़ सकता है। इंजीनियरिंग डिविजन के लिए रेवेन्यू ग्रोथ टारगेट को हासिल करना भी एक चुनौती होगी।
