Hipolin Limited की फाइनेंशियल ईयर 2025-26 की रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें कंपनी को **₹0.77 करोड़** का नेट लॉस हुआ है। ऑडिट रिपोर्ट में SEBI के नियमों का उल्लंघन करते हुए CFO और स्वतंत्र निदेशकों (Independent Directors) की नियुक्ति न करने पर कड़ी आपत्ति जताई गई है।
घाटे का गणित और सुस्ती
कंपनी की 33वीं एनुअल रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल कंपनी को ₹0.77 करोड़ का नुकसान हुआ है, हालांकि पिछले फाइनेंशियल ईयर में यह आंकड़ा ₹3.28 करोड़ था। कंपनी की कुल इनकम घटकर ₹14.33 करोड़ पर आ गई है, जो पिछले साल ₹21.93 करोड़ थी। मैनेजमेंट का कहना है कि डिटर्जेंट मार्केट में कड़ा मुकाबला और कच्चे माल (Raw Material) की बढ़ती कीमतों ने मुनाफे पर चोट पहुंचाई है।
गवर्नेंस पर गंभीर सवाल
ऑडिटर्स ने कंपनी की कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कंपनी ने SEBI LODR रेगुलेशन और कंपनी एक्ट के सेक्शन 203 का पालन नहीं किया है। रिपोर्ट में स्पष्ट है कि कंपनी में CFO का पद खाली है और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स का कार्यकाल भी तय सीमा से ज्यादा हो चुका है, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।
आगे की राह
आगामी 29 सितंबर, 2026 को होने वाली एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में शेयरधारकों की नजरें इस बात पर होंगी कि क्या शैलेशकुमार जयंतीलाल शाह को मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में मंजूरी मिलती है। निवेशकों के लिए कंपनी द्वारा CFO की नियुक्ति और बोर्ड में बदलाव करना रेगुलेटरी सख्ती से बचने के लिए सबसे जरूरी कदम होगा।
