EPACK Durable Limited ने अपनी 7वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में सभी प्रस्तावों को पास कर लिया है, लेकिन कंपनी के लिए एक बड़ी मुश्किल सामने आई है। फाइनेंशियल ईयर **2025-26** के लिए स्टेट्यूटरी और सेक्रेटेरियल ऑडिटर्स ने 'क्वालीफाइड ओपिनियन' जारी किया है, जो गवर्नेंस पर सवाल खड़े करता है।
AGM के फैसले और ऑडिट की चिंताएं
18 सितंबर, 2026 को आयोजित 7वीं एनुअल जनरल मीटिंग में कंपनी ने अपने सभी जरूरी एजेंडे पास कर लिए। इसमें मुख्य रूप से 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स को मंजूरी देना, अजय डीडी सिंघानिया की मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में फिर से नियुक्ति और Deloitte Haskins & Sells को दोबारा स्टेट्यूटरी ऑडिटर के तौर पर चुनना शामिल था।
क्यों है यह मामला गंभीर?
मीटिंग के दौरान सबसे बड़ी बात जो सामने आई, वह ऑडिट रिपोर्ट में दी गई 'क्वालीफाइड ओपिनियन' है। स्टेट्यूटरी ऑडिटर Deloitte Haskins & Sells और सेक्रेटेरियल ऑडिटर SBYN & Associates, LLP दोनों ने ही ऑडिट में कमियां निकाली हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि कंपनी के फाइनेंशियल स्टेटमेंट या नियमों के पालन (compliance) में कुछ ऐसी गड़बड़ियां मिली हैं, जो रेगुलेटरी स्टैंडर्ड्स के अनुरूप नहीं हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम (Risks for Investors)
फिलहाल, ऑडिट क्वालिफिकेशन की पूरी जानकारी स्पष्ट न होने से निवेशकों में असमंजस है। शेयरधारकों को यह समझने की जरूरत है कि क्या यह महज प्रक्रियात्मक चूक है या फिर कंपनी के इंटरनल कंट्रोल्स में बड़ी गड़बड़। बोर्ड ने निवेशकों से एनुअल रिपोर्ट पढ़ने की सलाह दी है, ताकि मैनेजमेंट की सफाई और आगे की रणनीति को समझा जा सके।
आगे क्या होगा?
आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी इन ऑडिट आपत्तियों को कैसे सुलझाती है। अगर मैनेजमेंट समय रहते इन चिंताओं को दूर नहीं करता, तो रेगुलेटरी जांच का दायरा बढ़ सकता है और स्टॉक की सेंटीमेंट्स पर बुरा असर पड़ सकता है।
