Dodla Dairy ने वितीय साल 2025-26 में अब तक का सबसे अधिक ₹4,125.20 करोड़ का सालाना रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल के मुकाबले **10.89%** ज्यादा है। कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) भी **2.72%** बढ़कर ₹266.99 करोड़ हो गया, जिसमें कुछ एक बार के फायदों का भी योगदान रहा।
Dodla Dairy का शानदार प्रदर्शन: ₹4,125 करोड़ का रिकॉर्ड रेवेन्यू
Dodla Dairy ने वितीय साल 2025-26 के लिए अपने नतीजे घोषित कर दिए हैं। कंपनी ने इस साल ₹4,125.20 करोड़ का समेकित रेवेन्यू (Consolidated Revenue) दर्ज किया है, जो पिछले वितीय साल के ₹3,720.07 करोड़ के मुकाबले 10.89% की शानदार बढ़ोतरी है। यह कंपनी के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा सालाना रेवेन्यू है।
मुनाफा और एक बार के फायदे
समेकित प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (Consolidated PAT) ₹266.99 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹259.93 करोड़ की तुलना में 2.72% अधिक है। इस PAT में लगभग ₹70 करोड़ का योगदान एक बार के फायदों (One-time benefits) का रहा, जिसमें टैक्स संबंधी अनुकूल ऑर्डर और ब्याज से हुई आय शामिल है।
क्यों यह महत्वपूर्ण है?
यह रिकॉर्ड रेवेन्यू दर्शाता है कि Dodla Dairy चुनौतीपूर्ण डेयरी इंडस्ट्री के माहौल में भी अपनी बिक्री बढ़ाने में कामयाब रही है। कंपनी पर लगभग कोई कर्ज नहीं है (Net-debt-free) और उसकी मजबूत लिक्विडिटी पोजीशन उसे एक स्थिर वित्तीय आधार प्रदान करती है। वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स (VAP) से ₹1,202.65 करोड़ का रेवेन्यू आना, जो कुल रेवेन्यू का 29.2% है, यह दिखाता है कि कंपनी उच्च मार्जिन वाले प्रोडक्ट्स की ओर सफलतापूर्वक बढ़ रही है।
कंपनी का विस्तार
Dodla Dairy के पास 1.3 लाख से ज्यादा किसानों का एक बड़ा प्रोक्योरमेंट नेटवर्क है और वह भारत, युगांडा और केन्या में 18 प्रोसेसिंग प्लांट चलाती है। कंपनी वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स पर ध्यान केंद्रित कर रही है और अपनी बाजार उपस्थिति को मजबूत करने के लिए बड़े ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स और अधिग्रहण पर काम कर रही है।
आगे क्या?
कंपनी महाराष्ट्र में सोलापुर के पास एक ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, जिसमें ₹280 करोड़ का निवेश होगा और इसके FY 2026-27 के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है। अगस्त 2025 में अधिग्रहित OSAM प्लेटफॉर्म को एकीकृत करने से पूर्वी भारत में कंपनी की स्थिति मजबूत होने की संभावना है। युगांडा में भी कंपनी विस्तार की योजना बना रही है।
ध्यान रखने योग्य जोखिम
बाजार की नजरें दूध की सप्लाई में लगातार आ रही बाधाओं और लागत में वृद्धि पर रहेंगी, जिससे कंपनी पर कीमतों को पूरी तरह से ग्राहकों पर डालने का दबाव बना हुआ है। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन की अनिश्चितता चारे की उपलब्धता और दूध उत्पादन को प्रभावित कर सकती है, जिससे परिचालन दक्षता पर असर पड़ सकता है।
