Dodla Dairy ने FSSAI द्वारा की जा रही कानूनी कार्रवाई की खबरों पर स्पष्टीकरण दिया है। कंपनी ने लैब रिपोर्ट्स में बड़ी विसंगतियों का दावा करते हुए कहा है कि रेफरल टेस्ट एक्सपायरी डेट के **2 महीने बाद** किया गया था।
क्या है पूरा मामला?
Dodla Dairy ने 17 अक्टूबर 2026 को FSSAI की एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद यह सफाई जारी की है। मामला तमिलनाडु के नीलाकोट्टई प्लांट से 9 जनवरी 2026 को लिए गए 'फुल क्रीम मिल्क' के 500 मिली सैंपल से जुड़ा है। कंपनी ने साफ किया है कि उसे अब तक रेगुलेटर से कोई औपचारिक प्रॉसिक्यूशन ऑर्डर नहीं मिला है।
लैब रिपोर्ट्स में क्या गड़बड़ी है?
निवेशकों की चिंता के बीच कंपनी ने लैब रिपोर्ट्स की विसंगतियों को उजागर किया है:
- प्राइमरी लैब रिपोर्ट (20 जनवरी 2026): इसमें दूध को 'सबस्टैंडर्ड' बताया गया, लेकिन यह भी साफ कहा गया कि इसमें किसी भी तरह के डिटर्जेंट या हानिकारक तत्वों का इस्तेमाल नहीं हुआ था।
- रेफरल लैब रिपोर्ट (20 मार्च 2026): इस रिपोर्ट में दूध को 'अनसेफ' बताया गया और डिटर्जेंट व कास्टिक सोडा होने का दावा किया गया।
कंपनी का तर्क है कि यह रेफरल टेस्ट प्रोडक्ट की 'बेस्ट-बिफोर' डेट (12 जनवरी 2026) के 2 महीने बाद किया गया था।
कंपनी का रुख
Dodla Dairy ने 24 अप्रैल 2026 को ही FSSAI के सामने अपना पक्ष रखा था। कंपनी ने जोर देकर कहा है कि हर बैच को बाजार में उतारने से पहले कड़े इंटरनल टेस्ट से गुजरना पड़ता है। फिलहाल मैनेजमेंट ने आश्वस्त किया है कि इस मुद्दे का कंपनी के ऑपरेशंस या फाइनेंशियल सेहत पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
आगे क्या होगा?
कंपनी ने कहा है कि वह शेयरधारकों को हर अपडेट से अवगत रखेगी और SEBI के नियमों के मुताबिक किसी भी जरूरी घटनाक्रम की जानकारी तुरंत साझा करेगी।
