Davin Sons Retail ने FY26 के नतीजे जारी कर दिए हैं, जिसमें रेवेन्यू में **40%** की भारी गिरावट आई है और यह ₹8.16 करोड़ रहा। वहीं, नेट प्रॉफिट भी **54%** घटकर ₹0.77 करोड़ रह गया है। कंपनी अब FMCG से हटकर गारमेंट बिजनेस पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रही है।
Davin Sons Retail के FY26 नतीजे: रेवेन्यू और मुनाफे में भारी गिरावट
Davin Sons Retail Limited ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए अपने ऑडिटेड वित्तीय नतीजे जारी किए हैं। कंपनी के रेवेन्यू में 39.7% की बड़ी गिरावट आई है, जो पिछले साल के ₹13.53 करोड़ से घटकर ₹8.16 करोड़ रह गया है। इसी तरह, नेट प्रॉफिट में 53.7% की और भी तेज गिरावट देखी गई, जो ₹1.66 करोड़ से घटकर ₹0.77 करोड़ हो गया। नतीजतन, कंपनी की प्रति शेयर आय (EPS) 67.0% गिरकर ₹1.36 पर आ गई है।
क्यों चिंताजनक हैं ये आंकड़े?
रेवेन्यू और मुनाफे में आई यह भारी कमी कंपनी के सामने मौजूद बड़ी परिचालन चुनौतियों को दर्शाती है। ₹3.84 करोड़ के निगेटिव ऑपरेटिंग कैश फ्लो (पिछले साल ₹1.18 करोड़ था) से पता चलता है कि कंपनी अपने मुख्य बिजनेस से नकदी जुटाने में संघर्ष कर रही है। इसके अलावा, इन्वेंट्री का ₹3.12 करोड़ से बढ़कर ₹6.73 करोड़ हो जाना, बिक्री की गति और भविष्य में संभावित राइट-ऑफ्स को लेकर चिंताएं बढ़ा रहा है।
बिजनेस में बड़े बदलाव की कहानी
Davin Sons Retail एक बड़ी स्ट्रेटेजिक शिफ्ट से गुजर रही है। कंपनी के FMCG डिवीजन के रेवेन्यू में भारी गिरावट आई है, जो FY25 के ₹7.42 करोड़ की तुलना में FY26 में सिर्फ ₹0.79 करोड़ रहा। इसके विपरीत, गारमेंट्स सेगमेंट ने अच्छा प्रदर्शन किया है, जिसका रेवेन्यू ₹6.11 करोड़ से बढ़कर ₹7.36 करोड़ हो गया है और उसने ₹1.02 करोड़ का प्रॉफिट भी दर्ज किया है।
आगे क्या बदल सकता है?
कंपनी का बिजनेस मॉडल अब पूरी तरह से गारमेंट्स सेगमेंट की ओर मुड़ गया है, जो अब रेवेन्यू का मुख्य जरिया बन गया है। मैनेजमेंट को अब FMCG डिवीजन के प्रदर्शन को सुधारने पर ध्यान देना होगा या फिर कंपनी के पोर्टफोलियो में इसकी भूमिका का पुनर्मूल्यांकन करना पड़ सकता है। बढ़ती इन्वेंट्री और निगेटिव कैश फ्लो को ठीक करना कंपनी के ऑपरेशंस को स्थिर करने के लिए बेहद जरूरी होगा।
किन जोखिमों पर नजर रखें?
लगातार निगेटिव ऑपरेटिंग कैश फ्लो कंपनी की लिक्विडिटी पर दबाव डाल रहा है। इन्वेंट्री का बड़ा होना, माल के एक्सपायर होने या राइट-ऑफ्स का जोखिम पैदा करता है। FMCG के धराशाई होने के बाद गारमेंट्स सेगमेंट पर भारी निर्भरता, कंसंट्रेशन रिस्क को भी बढ़ाती है।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशक अब कंपनी की परिचालन क्षमता में सुधार के संकेतकों की तलाश करेंगे, खासकर इन्वेंट्री प्रबंधन और कैश फ्लो जनरेशन के मोर्चे पर। गारमेंट्स सेगमेंट की रणनीतिक दिशा और प्रदर्शन, साथ ही FMCG बिजनेस में कोई भी बदलाव, आने वाली तिमाहियों में प्रमुख इंडिकेटर्स होंगे।
