Bikaji Foods International ने FY 2025-26 के लिए अपने नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का रेवेन्यू **14.4%** बढ़कर **₹2,993.86 करोड़** हो गया, जबकि प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) **31%** की जोरदार छलांग लगाकर **₹254.41 करोड़** पर पहुंच गया। वॉल्यूम ग्रोथ और बेहतर मार्जिन ने इस प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाई।
Detailed Coverage
Bikaji Foods International ने FY2025-26 में दमदार प्रदर्शन किया
Bikaji Foods International Ltd ने FY 2025-26 के लिए अपने वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी के रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस (Revenue from operations) में पिछले साल के मुकाबले 14.4% का इजाफा हुआ और यह ₹2,993.86 करोड़ रहा। वहीं, इस अवधि के लिए प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) ₹254.41 करोड़ दर्ज किया गया।
नतीजों की खास बातें
कंपनी ने अपनी लाभप्रदता (profitability) में भी सुधार दिखाया है। EBITDA ₹410.59 करोड़ रहा, जिससे EBITDA मार्जिन 13.7% हो गया, जो पिछले साल से 120 बेसिस पॉइंट ज्यादा है। ग्रॉस मार्जिन (Gross margins) में भी 290 बेसिस पॉइंट का सुधार हुआ और यह 35.1% पर पहुंच गया। कंपनी का कहना है कि यह बेहतर मार्जिन कच्चे माल की अनुकूल कीमतों और लागत दक्षता (cost efficiencies) का नतीजा है।
कंपनी का बैकग्राउंड
एथनिक स्नैक्स (Ethnic snacks) अभी भी कंपनी का सबसे बड़ा सेगमेंट है, जिसने बिक्री में 68.9% का योगदान दिया और इसमें 11.2% की सालाना ग्रोथ देखी गई। पैक्ड स्वीट्स (Packaged sweets) में 8.9% और पापड़ (papad) की बिक्री में 10.9% की बढ़ोतरी हुई।
क्या बदला है?
Deepak Agarwal ने अब कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (Chairman and Managing Director) का पद संभाला है। कंपनी ने Petunt Food Processors Private Limited में अपनी बाकी हिस्सेदारी का अधिग्रहण (acquisition) करके और Vindhyawasini Sales Private Limited का मर्जर (merger) करके अपनी स्थिति को और मजबूत किया है। कंपनी का एक्सपोर्ट बिजनेस ₹100 करोड़ के पार पहुंच गया है, जिसमें 52.3% की ग्रोथ दर्ज की गई है।
आगे क्या चिंताएं?
आगे चलकर, कंपनी को आटा (flour), दाल (lentils) और पैकेजिंग मैटेरियल (packaging materials) जैसी चीजों की लागत बढ़ने से मार्जिन पर असर पड़ने का जोखिम हो सकता है। साथ ही, स्नैक मार्केट में कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण ब्रांड पर लगातार निवेश और नवाचार (innovation) की जरूरत होगी।
भविष्य पर नज़र
निवेशक अब कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के मार्जिन पर पड़ने वाले असर और कंपनी के अंतरराष्ट्रीय कारोबार के प्रदर्शन पर बारीकी से नज़र रखेंगे, जिसमें नेपाल में उसका नया ज्वाइंट वेंचर (joint venture) भी शामिल है।
