Bata India ने वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का रेवेन्यू मामूली बढ़कर ₹3,515.48 करोड़ हो गया, लेकिन नेट प्रॉफिट में भारी गिरावट आई है और यह ₹133.56 करोड़ रहा। पिछले साल यह ₹328.45 करोड़ था। एकमुश्त खर्चों और पिछले साल के नॉन-रिकरिंग गेन को इसका कारण बताया गया है। कंपनी ने ₹9 प्रति शेयर डिविडेंड की भी सिफारिश की है।
Bata India के FY26 नतीजे: रेवेन्यू स्थिर, पर मुनाफे में बड़ी गिरावट!
Bata India ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने वित्तीय नतीजे पेश कर दिए हैं। कंपनी के रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस (Revenue from operations) में मामूली 0.79% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹3,515.48 करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले साल ₹3,488.03 करोड़ था।
हालांकि, कंपनी के स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट (Net Profit) में भारी गिरावट देखी गई है। यह घटकर ₹133.56 करोड़ रह गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में यह ₹328.45 करोड़ था। इस गिरावट का मुख्य कारण वॉलंटरी रिटायरमेंट स्कीम (VRS) और लेबर कोड ऑब्लिगेशन्स (Labour Code obligations) से जुड़े एकमुश्त असाधारण खर्चे (exceptional costs) माने जा रहे हैं। साथ ही, पिछले साल के नॉन-रिकरिंग गेन्स (non-recurring gains) की तुलना में इस साल कमी भी एक वजह है।
**निवेशकों के लिए खास:
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रेवेन्यू में भले ही थोड़ी बढ़ोतरी दिख रही हो, लेकिन एकमुश्त खर्चों और कमजोर मांग के कारण मुनाफे में आई बड़ी गिरावट चिंता का विषय है। कंपनी ने ₹9 प्रति इक्विटी शेयर के डिविडेंड (Dividend) की भी सिफारिश की है।
प्रबंधन में बदलाव:
इसके अलावा, कंपनी ने एक महत्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन की भी घोषणा की है। संजय एस. राव (Sanjay S. Rao) 1 अक्टूबर, 2026 से गंजन शाह (Gunjan Shah) की जगह एमडी और सीईओ (MD & CEO) का पद संभालेंगे। कंपनी की नई डिविडेंड डिस्ट्रिब्यूशन पॉलिसी (Dividend Distribution Policy) के तहत, अब लाभ का 40% या उससे अधिक शेयरधारकों को डिविडेंड के रूप में दिया जाएगा।
जोखिम (Risks):
मैनेजमेंट का कहना है कि कंज्यूमर खर्च में लगातार सुस्ती एक बड़ा जोखिम है। इसके अलावा, महंगाई, करेंसी में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) सप्लाई चेन और लागतों को प्रभावित कर सकते हैं।
आगे क्या देखें:
निवेशकों को कंपनी की कमजोर मांग के बीच वॉल्यूम ग्रोथ बढ़ाने की क्षमता, 'रीइग्नाइट' ट्रांसफॉर्मेशन स्ट्रेटेजी (Reignite transformation strategy) की प्रभावशीलता और VRS तथा लेबर कोड से जुड़े खर्चों के वित्तीय प्रभाव पर नजर रखनी चाहिए। आगामी नेतृत्व परिवर्तन भी एक महत्वपूर्ण बिंदु होगा।
