Arur Footwear ने CIRP प्रक्रिया के बाद अपना पहला पूरा फाइनेंशियल ईयर पूरा कर लिया है। कंपनी ने **₹1.5 लाख** का रेवेन्यू दर्ज किया है और घाटा कम होकर **₹58.83 लाख** रह गया है, लेकिन BSE से लिस्टिंग मंजूरी न मिलने के कारण ट्रेडिंग अभी भी सस्पेंडेड है।
कारोबार की नई शुरुआत
CIRP प्रक्रिया से गुजरने के बाद Arur Footwear ने कमर्शियल कामकाज शुरू कर दिया है। Bazel International Limited के पास कंपनी की 50.10% हिस्सेदारी है। FY26 में कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹0.015 करोड़ रहा और टैक्स से पहले का घाटा सिमटकर ₹0.5883 करोड़ पर आ गया है।
क्यों रुकी है ट्रेडिंग?
निवेशक अभी भी असमंजस में हैं क्योंकि रिजॉल्यूशन प्लान के तहत आवंटित शेयर अभी तक डीमैट खातों में क्रेडिट नहीं हुए हैं। 30 दिसंबर, 2024 से कंपनी के शेयर सस्पेंडेड हैं और मैनेजमेंट BSE से जरूरी मंजूरी मिलने का इंतजार कर रहा है।
ब्रांड और विस्तार की रणनीति
कंपनी ने युवाओं को टारगेट करते हुए अपना D2C ब्रांड 'Pacalop' लॉन्च किया है। इसके अलावा, प्रीमियम स्नीकर ब्रांड 'Arur' प्रोटोटाइपिंग स्टेज में है और 'Navo' स्कूल फुटवियर का परीक्षण चल रहा है। कंपनी अपने हेड ऑफिस को पंजाब से हिमाचल प्रदेश शिफ्ट करने की तैयारी में है ताकि मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के साथ तालमेल बेहतर हो सके।
रिस्क और गवर्नेंस
मैनेजमेंट ने पुरानी गलतियों के लिए ₹26.07 लाख का SOP जुर्माना विरोध दर्ज करते हुए भरा है, जिसकी वापसी के लिए कंपनी SAT (Securities Appellate Tribunal) के पास गई है। बोर्ड ने मयंक आहूजा को एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नियुक्त किया है। कंपनी की 36वीं AGM 26 सितंबर, 2026 को आयोजित की जाएगी।
