Yasho Industries ने Q2 FY27 के लिए दमदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का रेवेन्यू **89.5%** बढ़कर **₹347.92 करोड़** और मुनाफा उछलकर **₹33.68 करोड़** पर पहुंच गया है, हालांकि बढ़ते फ्रेट खर्चों ने मार्जिन पर दबाव डाला है।
मुनाफे में धमाकेदार उछाल
Yasho Industries के लिए दूसरी तिमाही का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है। कंपनी का नेट प्रॉफिट (PAT) साल-दर-साल आधार पर 593% उछलकर ₹33.68 करोड़ हो गया है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह ₹4.86 करोड़ था। कंपनी का रेवेन्यू भी 89.5% की बढ़त के साथ ₹347.92 करोड़ पर पहुंच गया है। कंपनी का EBITDA 118.2% बढ़कर ₹72.92 करोड़ रहा है।
मार्जिन पर क्यों है दबाव?
कंपनी के कुल रेवेन्यू का 70% हिस्सा एक्सपोर्ट्स से आता है। हालांकि, ऑपरेशनल फ्रंट पर कुछ चुनौतियां सामने आई हैं। फ्रेट (माल ढुलाई) का खर्च पिछले क्वार्टर के ₹10 करोड़ से बढ़कर ₹20 करोड़ हो गया है। इसके अलावा, गैस की कीमतों में तेजी के कारण खर्चों में ₹1.8 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ा है। इन बढ़ती लागतों को तुरंत ग्राहकों पर न डाल पाने की वजह से कंपनी के मार्जिन में क्वार्टर-ऑन-क्वार्टर 300 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट दर्ज की गई है।
भविष्य की योजना और Capex
मैनेजमेंट ने FY27 के लिए ₹250 करोड़ के Capex प्लान की पुष्टि की है। इसे ₹100 करोड़ इंटरनल एक्रूअल्स और ₹150 करोड़ के टर्म लोन से पूरा किया जाएगा। पखाजन (Pakhajan) साइट पर दो नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का काम जारी है, जो Q4 FY28 से Q1 FY29 के बीच शुरू हो सकती हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम (Risks to watch)
फिलहाल डिलीवरी में देरी 30-60 दिन तक हो रही है, जो पहले 25-30 दिन हुआ करती थी। आने वाले समय में मैनेजमेंट द्वारा कीमतों को बढ़ाने की क्षमता ही मार्जिन को स्टेबल करने की चाबी होगी। साथ ही, कंपनी का एक्सपोर्ट पर ज्यादा निर्भर होना उसे ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल हालातों के प्रति संवेदनशील बनाता है। वर्तमान में कंपनी का कैपेसिटी यूटिलाइजेशन 66% है, जिस पर नजर रखना जरूरी है।
