DGTR ने चीन से आयात होने वाले इनसॉल्यूबल सल्फर (Insoluble Sulphur) के खिलाफ काउंटरवेलिंग ड्यूटी (एंटी-सब्सिडी) जांच शुरू कर दी है। देश की एकमात्र घरेलू उत्पादक कंपनी OCCL Ltd ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी।
क्या है पूरा मामला?
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (DGTR) ने चीन से भारत आने वाले इनसॉल्यूबल सल्फर की जांच शुरू कर दी है। OCCL Ltd का आरोप है कि चीन सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी के कारण भारतीय बाजार में इनसॉल्यूबल सल्फर की कीमतों पर बुरा असर पड़ रहा है। इस जांच के दायरे में चीन के 79 सरकारी सब्सिडी प्रोग्राम आएंगे, जो यह तय करेंगे कि क्या इससे भारतीय इंडस्ट्री को नुकसान हो रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?
भारतीय मैन्युफैक्चरर्स लंबे समय से सस्ते विदेशी आयात का दबाव झेल रहे हैं। यदि DGTR की जांच में यह साबित होता है कि चीनी कंपनियों को अनुचित लाभ मिल रहा है, तो सरकार इन पर अतिरिक्त ड्यूटी लगा सकती है। इससे OCCL को अपनी प्राइसिंग पावर सुधारने और मार्केट शेयर बचाने में बड़ी मदद मिल सकती है।
क्या है पुरानी हिस्ट्री?
OCCL के लिए यह कोई नई बात नहीं है। कंपनी पहले से ही जून 2025 से चीन और जापान से आने वाले इनसॉल्यूबल सल्फर पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी (ADD) का लाभ ले रही है। सितंबर 2026 में हुई एंटी-एब्जॉर्प्शन जांच के बाद ड्यूटी के दायरे को और सख्त करने की सिफारिश की गई थी, जो कंपनी की बाजार रक्षा की मंशा को साफ दर्शाता है।
निवेशकों के लिए जोखिम और सलाह
हालांकि यह कदम सकारात्मक दिख रहा है, लेकिन रेगुलेटरी जांच में काफी समय लगता है। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इसका वित्तीय फायदा कब और कितना होगा। वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) द्वारा अंतिम फैसला लिए जाने तक निवेशकों को DGTR की रिपोर्ट और सरकार के आधिकारिक नोटिफिकेशन्स पर नजर रखनी चाहिए। फिलहाल कंपनी के स्तर पर कोई तत्काल फाइनेंशियल इंपैक्ट स्पष्ट नहीं है।
