Nexxus Petro Industries राजस्थान के पाली में 30 TPD क्षमता वाला अपना टायर पाइरोलिसिस प्लांट शुरू करने जा रही है। कंपनी का लक्ष्य पहले फेज से सालाना **₹25-30 करोड़** का रेवेन्यू हासिल करना है। कमर्शियल प्रोडक्शन **30 अगस्त, 2026** से शुरू होगा। यह कदम कंपनी को हाई-मार्जिन मैन्युफैक्चरिंग की ओर ले जा रहा है।
Nexxus Petro का राजस्थान में नया टायर पाइरोलिसिस प्लांट
Nexxus Petro Industries लिमिटेड राजस्थान के पाली में 30 TPD (टन प्रति दिन) क्षमता वाला अपना यूज्ड टायर पाइरोलिसिस प्लांट (Used Tyre Pyrolysis Plant) शुरू करने वाली है। इस प्लांट से कमर्शियल प्रोडक्शन 30 अगस्त, 2026 से शुरू होने की उम्मीद है। प्रोजेक्ट के पहले फेज (Phase 1) में ₹14 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) आएगा, जिसे कंपनी इंटरनल एक्रुअल्स (Internal Accruals) से फंड करेगी।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यह Nexxus Petro के लिए एक बड़ा स्ट्रेटेजिक बदलाव है। कंपनी अब ऑयल और कार्बन की ट्रेडिंग से हटकर खुद मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) के क्षेत्र में कदम रख रही है। कंपनी को उम्मीद है कि यह नया सेगमेंट 8-10% का बेहतर नेट प्रॉफिट (PAT Margin) देगा। कंपनी का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2026-27 तक कंसोलिडेटेड टर्नओवर (Consolidated Turnover) ₹400 करोड़ तक पहुंच सकता है, जिसमें PAT कम से कम 4% रहने की उम्मीद है।
पहले कंपनी हर महीने लगभग 250-300 MT ऑयल और 180-200 MT कार्बन का ट्रेड करती थी। अब खुद का यूज्ड टायर पाइरोलिसिस ऑयल (TPO) और कार्बन बनाकर, Nexxus Petro मैन्युफैक्चरिंग से वैल्यू एडिशन (Value Addition) हासिल करना चाहती है। TPO का इस्तेमाल हॉट-मिक्स बिटुमेन प्लांट (Hot-mix bitumen plants) में लाइट डीजल ऑयल (LDO) के विकल्प के तौर पर किया जा सकता है।
कंपनी की पिछली स्थिति
Nexxus Petro Industries पहले से ही ट्रेडिंग एक्टिविटीज (Trading Activities) में शामिल रही है। पाइरोलिसिस प्लांट में निवेश का यह फैसला बैकवर्ड इंटीग्रेशन (Backward Integration) और इन-हाउस प्रोडक्शन (In-house production) की ओर एक कदम है, जिससे प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) और वैल्यू चेन (Value Chain) पर कंट्रोल बढ़ेगा।
अब क्या बदलेगा?
कंपनी अब TPO और कार्बन का मैन्युफैक्चरिंग करेगी। पहले फेज में 30 TPD की कैपेसिटी होगी और इसके साथ 500 KL का ऑन-साइट लिक्विड स्टोरेज (On-site liquid storage) भी होगा। कंपनी पहले फेज के सफल कमर्शियल ऑपरेशन के कुछ महीनों के भीतर दूसरे फेज (Phase 2) का विस्तार भी करेगी, जिसमें एक अतिरिक्त 30 TPD का मॉड्यूलर यूनिट (Modular Unit) लगेगा।
निवेशकों के लिए जोखिम (Risks to watch)
निवेशकों को कुछ संभावित जोखिमों पर भी ध्यान देना चाहिए। रेवेन्यू (Revenue) और मार्जिन (Margins) पर सीजनैलिटी (Seasonality) का असर पड़ सकता है, खासकर मॉनसून के दौरान (H1) जब TPO के प्रमुख उपयोग, यानी रोड-लेइंग एक्टिविटीज (Road-laying activities), अक्सर रुक जाती हैं। इसके अलावा, मार्जिन क्रूड ऑयल (Crude oil) की कीमतों के प्रति संवेदनशील हैं, क्योंकि रॉ बिटुमेन (Raw bitumen) एक महत्वपूर्ण कॉस्ट कंपोनेंट (Cost component) है। ऑपरेशंस को बढ़ाने का काम सरकारी नियमों और बायो-बिटुमेन (Bio-bitumen) से संबंधित गाइडलाइंस पर भी निर्भर कर सकता है।
मैनेजमेंट की टिप्पणी
कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, मिस्टर हरेष संघानी (Mr. Haresh Senghani) ने कहा कि नया प्लांट कंपनी को हाई-मार्जिन इन-हाउस प्रोडक्शन में ले जा रहा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि निवेश इंटरनल एक्रुअल्स से किया गया है, जो डिसिप्लिन्ड कैपिटल मैनेजमेंट (Disciplined capital management) पर कंपनी के फोकस को दर्शाता है। कंपनी ने यह भी बताया कि इस प्रोजेक्ट पर लगभग 5% सालाना ब्याज सब्सिडी (Interest subsidy) का 7 साल तक लाभ मिलने की उम्मीद है, जो जरूरी अप्रूवल (Approvals) के अधीन है।
ध्यान देने योग्य बातें (Context Metrics)
- फेज 1 रेवेन्यू टारगेट: ₹25–30 करोड़ प्रति वर्ष।
- फेज 2 रेवेन्यू टारगेट: ₹50–60 करोड़ प्रति वर्ष।
- फेज 1 कैपेसिटी: 30 TPD।
- फेज 2 कैपेसिटी: 60 TPD तक बढ़ाई जा सकती है।
- कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू: 30 अगस्त, 2026।
- कैपिटल एक्सपेंडिचर: ₹14 करोड़।
- प्रोजेक्टेड FY 2026-27 कंसोलिडेटेड टर्नओवर: ₹400 करोड़।
- प्रोजेक्टेड FY 2026-27 कंसोलिडेटेड PAT: कम से कम 4%।
- सेगमेंट PAT मार्जिन टारगेट: 8–10%।
आगे क्या?
निवेशकों को 30 अगस्त, 2026 तक कमर्शियल प्रोडक्शन की सफल शुरुआत और फेज 2 के विस्तार पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। कंपनी की अनुमानित रेवेन्यू और मार्जिन लक्ष्यों को प्राप्त करने की क्षमता, साथ ही रॉ मटेरियल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सीजनल डिमांड को मैनेज करना, महत्वपूर्ण होगा।
