National Peroxide Limited (NPL) ने घाटे से बाहर निकलते हुए फाइनेंशियल ईयर 2026 में **₹5.82 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। कंपनी ने अपने शेयरधारकों के लिए प्रति शेयर **₹7** का डिविडेंड घोषित किया है, लेकिन कुछ आंतरिक ऑडिट जोखिमों पर नजर रखना जरूरी है।
मुनाफे में वापसी और डिविडेंड का ऐलान
कंपनी ने अपने सालाना नतीजों में जबरदस्त सुधार दिखाया है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में ₹2.24 करोड़ का नुकसान झेलने वाली National Peroxide ने इस बार ₹5.82 करोड़ का मुनाफा कमाया है। कंपनी की कुल आय ₹295.68 करोड़ रही, जबकि EBITDA में 53.39% का उछाल देखा गया और यह ₹30.21 करोड़ पर पहुंच गया। इस परफॉर्मेंस के बाद बोर्ड ने प्रति शेयर ₹7 का डिविडेंड देने का प्रस्ताव रखा है, जिसे 29 सितंबर 2026 को होने वाली AGM में मंजूरी दी जाएगी। डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट 22 सितंबर 2026 तय की गई है।
ऑडिटर्स की चेतावनी और रिस्क फैक्टर्स
ऑपरेशनल रिकवरी के बावजूद निवेशकों को कंपनी के इंटरनल सिस्टम पर नजर रखनी चाहिए। स्टैट्यूटरी ऑडिटर्स ने अपनी रिपोर्ट में 'Emphasis of Matter' का जिक्र किया है। ERP कॉन्फ़िगरेशन में एक बड़ी गलती के कारण रॉ मटीरियल की लागत और ट्रेड क्रेडिटर्स की वैल्यू में ₹6.94 करोड़ की गड़बड़ी पाई गई थी, जिससे इंटरनल फाइनेंशियल कंट्रोल की मजबूती पर सवाल खड़े होते हैं।
क्रेडिट रेटिंग पर दबाव
अच्छे मुनाफे के बावजूद India Ratings & Research (Ind-Ra) ने कंपनी की क्रेडिट रेटिंग को घटाकर 'IND A-' कर दिया है और आउटलुक 'नेगेटिव' रखा है। यह दर्शाता है कि कंपनी की कर्ज प्रबंधन स्थिति और वित्तीय स्थिरता पर अभी भी दबाव बना हुआ है। कंपनी में हाल ही में CFO और कंपनी सेक्रेटरी के पद पर नए चेहरे आए हैं, जो मैनेजमेंट में बदलाव के संकेत देते हैं।
