Jyoti Resins & Adhesives ने इस बार कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। कंपनी ने पहली तिमाही (Q1 FY27) में ₹87.71 करोड़ का अब तक का सबसे ज्यादा रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल के मुकाबले **17%** ज्यादा है। हालांकि, बढ़ती रॉ मैटेरियल की कीमतों के कारण कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन में भारी गिरावट आई है।
कमाई में रिकॉर्ड, पर मुनाफा घटा?
Jyoti Resins & Adhesives Ltd. ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने रेवेन्यू के मामले में नया कीर्तिमान स्थापित किया है, जो ₹87.71 करोड़ तक पहुंच गया। यह पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 17% की छलांग है। कंपनी की मानें तो यह वॉल्यूम में बढ़ोतरी और बेहतर रियलाइजेशन का नतीजा है।
लेकिन, इस रिकॉर्ड कमाई के बावजूद, कंपनी के मुनाफे (Profit) पर असर पड़ा है। नेट प्रॉफिट घटकर ₹11.75 करोड़ रह गया, जो पिछले साल की पहली तिमाही में ₹17.38 करोड़ था। इस तिमाही के लिए अर्निंग्स पर शेयर (EPS) ₹10 दर्ज किया गया।
मार्जिन पर क्यों पड़ा दबाव?
कंपनी के रेवेन्यू में शानदार ग्रोथ दिख रही है, जो बाजार की मजबूत मांग और सेल्स स्ट्रैटेजी को दर्शाती है। पर, प्रॉफिट में आई बड़ी गिरावट (EBITDA मार्जिन 14.4% से घटकर 27.5% और PAT मार्जिन 13.4% से घटकर 23.1% रह गया) यह साफ दिखाता है कि कंपनी इनपुट कॉस्ट में उतार-चढ़ाव के प्रति कितनी संवेदनशील है। निवेशकों की नजरें अब इस बात पर होंगी कि कंपनी इस लागत को ग्राहकों पर कितना डाल पाती है और सप्लाई चेन की दिक्कतों को कैसे मैनेज करती है।
आखिर क्या है वजह?
Jyoti Resins एडहेसिव्स और रेजिन सेक्टर में काम करती है। इस तिमाही के नतीजों के पीछे पश्चिम एशिया में चल रहे जियो-पॉलिटिकल टेंशन का भी हाथ है, जिसने रॉ मैटेरियल की कीमतों को बढ़ा दिया है। माना जा रहा है कि अपने कॉम्पिटिटर्स के मुकाबले कंपनी का इन्वेंटरी लेवल कम होने से भी इन बढ़ी कीमतों का असर और गहरा हो गया।
आगे क्या उम्मीद?
कंपनी के मैनेजमेंट ने भरोसा जताया है कि EBITDA मार्जिन Q2 FY27 तक सुधरकर 23-25% तक पहुंच जाएगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि मई और जून 2026 में कीमतों में बढ़ोतरी की गई है और रॉ मैटेरियल की कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है। साथ ही, कंपनी अपनी कैपेसिटी बढ़ाने पर भी तेजी से काम कर रही है। एक ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट 80% पूरा हो चुका है, जिससे कैपेसिटी 2,000 TPM से बढ़कर 3,500 TPM हो जाएगी। एक ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट की प्लानिंग भी चल रही है।
किन बातों का ध्यान रखें?
सबसे बड़ा रिस्क रॉ मैटेरियल की कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव है, जो जियो-पॉलिटिकल फैक्टर से और बढ़ सकता है। साथ ही, मॉनसून का असर कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी पर पड़ सकता है, जो Q2 में एक चुनौती साबित हो सकता है। हालांकि, मैनेजमेंट मार्जिन में सुधार की उम्मीद कर रहा है।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशकों को Q2 FY27 के नतीजों का इंतजार करना चाहिए ताकि मैनेजमेंट के मार्जिन रिकवरी वाले दावे की पुष्टि हो सके। ब्राउनफील्ड एक्सपेंशन प्रोजेक्ट का समय पर पूरा होना और उससे वॉल्यूम ग्रोथ में मिलने वाली मदद भी अहम होगी। साथ ही, कंपनी की नेट डेट-पॉजिटिव पोजीशन बनाए रखते हुए एक्सपेंशन के लिए फंडिंग करना भी महत्वपूर्ण होगा।
