Grasim Industries ने विलायत, गुजरात में अपने नए **50,000 टन प्रति वर्ष** क्षमता वाले एपिक्लोरोहाइड्रिन (ECH) प्लांट में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर दिया है। यह कदम कंपनी के क्लोर-अल्कली डेरिवेटिव्स पोर्टफोलियो को मजबूत करेगा।
कमर्शियल प्रोडक्शन की शुरुआत
Grasim Industries ने 21 अक्टूबर 2026 से विलायत, गुजरात में स्थित अपनी नई एपिक्लोरोहाइड्रिन (ECH) इकाई को पूरी तरह से चालू कर दिया है। 50,000 टन प्रति वर्ष (TPA) की क्षमता वाला यह प्लांट अब आधिकारिक तौर पर रेवेन्यू जनरेटिंग एसेट (Revenue-generating asset) में बदल चुका है।
बिजनेस पर प्रभाव
एपिक्लोरोहाइड्रिन (ECH) का इस्तेमाल मुख्य रूप से इपॉक्सी रेजिन्स (Epoxy resins) बनाने में होता है। भारत में मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाकर Grasim ने न केवल अपने क्लोर-अल्कली डेरिवेटिव्स बिजनेस को मजबूती दी है, बल्कि कंपनी बेसिक कमोडिटी केमिकल्स से हटकर हाई-डिमांड वाले डाउनस्ट्रीम प्रोडक्ट्स की ओर कदम बढ़ा रही है।
निवेशकों के लिए अहम जानकारी
अब जबकि प्लांट ऑपरेशनल हो गया है, निवेशकों की नजरें इसके कैपेसिटी यूटिलाइजेशन (Capacity utilization) और मार्जिन कंट्रीब्यूशन पर होंगी। आने वाली तिमाही नतीजों में इस प्लांट से होने वाली कमाई साफ तौर पर नजर आएगी। हालांकि, किसी भी नए केमिकल प्लांट की तरह, शुरुआती दिनों में टेक्निकल स्टेबिलिटी और ECH मार्केट की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर नजर रखना जरूरी है।
आगामी अर्निंग कॉल्स में मैनेजमेंट की कमेंट्री यह साफ करेगी कि यह फैसिलिटी कंपनी के ओवरऑल मुनाफे में कितना योगदान दे रही है।
