Godavari Biorefineries ने Q2 FY27 के नतीजे पेश किए हैं, जिसमें कंपनी का नेट लॉस घटकर **₹15.2 करोड़** रह गया है, जो पिछले साल इसी तिमाही में **₹41.6 करोड़** था। कंपनी का रेवेन्यू बढ़कर **₹549.8 करोड़** हो गया है।
मुनाफे की राह पर कंपनी
कंपनी ने सितंबर 2026 को समाप्त तिमाही के लिए अपने फाइनेंशियल रिजल्ट्स जारी किए हैं। कंपनी का टोटल रेवेन्यू पिछले साल के ₹434.4 करोड़ से बढ़कर ₹549.8 करोड़ पर पहुंच गया है। अच्छी बात यह है कि कंपनी का EBITDA बढ़कर ₹10.9 करोड़ हो गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹4.4 करोड़ का घाटा था।
क्यों है यह जरूरी?
कंपनी मौजूदा समय में नेशनल इथेनॉल सप्लाई ईयर (ESY) पॉलिसी के बड़े बदलावों से गुजर रही है। गन्ने के रस और बी-हेवी मोलासेस के उत्पादन पर रोक के कारण कंपनी अब तेजी से ग्रेन-बेस्ड (अनाज आधारित) इथेनॉल की ओर शिफ्ट हो रही है। जून 2026 में शुरू की गई नई डिस्टिलरी इसी रणनीति का हिस्सा है।
सेगमेंट का प्रदर्शन
- बायो-बेस्ड केमिकल्स: यह सेगमेंट ग्रोथ का मुख्य इंजन बना हुआ है। इसका रेवेन्यू 39% बढ़कर ₹204.2 करोड़ रहा और EBITDA मार्जिन 10.8% तक पहुंच गया है।
- शुगर और इथेनॉल: यह सेगमेंट दबाव में है, जहां EBITDA मार्जिन 2.6% निगेटिव दर्ज किया गया है, जिसकी वजह मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट में बढ़ोतरी है।
रिस्क फैक्टर
मानसून के कारण मक्के (Maize) की कीमतों में उतार-चढ़ाव कंपनी के लिए चिंता का विषय है। इसके अलावा, कॉर्न-इथेनॉल की खरीद दर ₹68.86/L पर तय होने से भविष्य के टेंडर्स में प्रॉफिटेबिलिटी को लेकर रिस्क बना हुआ है। हालांकि, कंपनी फार्मा सेक्टर में भी डायवर्सिफाई कर रही है और अपने मुख्य मॉलिक्यूल के ट्रायल पर काम कर रही है।
