Everest Organics लिमिटेड ने फाइनेंशियल ईयर **2026** में शानदार वापसी की है। कंपनी ने **₹5.55 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जबकि पिछले साल कंपनी **₹1.29 करोड़** के घाटे में थी। हालांकि, कंपनी की वित्तीय सेहत सुधर रही है, लेकिन NCLT की कानूनी प्रक्रिया और पेंडिंग सरकारी मंजूरियां निवेशकों के लिए एक बड़ा रिस्क बनी हुई हैं।
फाइनेंशियल टर्नअराउंड की कहानी
कंपनी ने अपने ऑपरेशंस में काफी सुधार किया है, जिसका नतीजा नतीजों में दिख रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2026 के दौरान कंपनी का टोटल रेवेन्यू बढ़कर ₹197.40 करोड़ हो गया है, जो पिछले साल ₹160.17 करोड़ था। इसके अलावा, कंपनी का प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) बढ़कर ₹8.05 करोड़ रहा है, जबकि पिछले साल यह ₹3.24 करोड़ का घाटा था। अभी कंपनी की कैपेसिटी यूटिलाइजेशन 80% से 90% के बीच है।
कानूनी चुनौतियां (Risks to Watch)
दिखने में सब कुछ अच्छा लग रहा है, लेकिन कंपनी के सिर पर कानूनी तलवार लटकी है। कई ऑपरेशनल क्रेडिटर्स ने NCLT में दिवाला प्रक्रिया (Corporate Insolvency Resolution Process) शुरू करने की याचिका दायर की है। हालांकि कंपनी अभी इन दावों का विरोध कर रही है और कोई ऑर्डर पास नहीं हुआ है, लेकिन निवेशकों के लिए यह एक बड़ा ट्रिगर पॉइंट है। इसके साथ ही, स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से 'Consent for Establishment' मिलने का भी इंतजार है।
AGM और भविष्य की राह
कंपनी 30 सितंबर 2026 को अपनी 33वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) आयोजित करने जा रही है। इसमें तीन नए इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स—वेंकटा रमना नर्रा (Venkata Ramana Narra), श्रीकांत रेड्डी कोल्ली (Srikanth Reddy Kolli) और सुब्रतो बनर्जी (Subroto Banerjee) की नियुक्ति पर वोटिंग होगी।
