Ester Industries के जॉइंट वेंचर ELITe को एक बड़ी ग्लोबल स्पोर्ट्स कंपनी से रीसाइकल्ड PET रेज़िन के लिए नॉन-बाइंडिंग लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) मिला है। यह JV की नई फैसिलिटी के लिए बड़ा संकेत है, जो 2028 में शुरू होने वाली है।
Ester Industries JV को मिला ग्रीन सिग्नल
Ester Industries और Loop Industries के जॉइंट वेंचर ELITe को एक प्रमुख ग्लोबल स्पोर्ट्स ब्रांड से हर साल 15,000 मीट्रिक टन (MT) तक के Loop™ PET Fiber Grade रेज़िन के लिए एक नॉन-बाइंडिंग लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) मिला है। यह एक बड़ी स्पोर्ट्स कंपनी की ओर से आया है, जो इस JV के लिए एक महत्वपूर्ण मांग का संकेत देता है।
क्यों है ये खास?
यह LOI JV के रीसाइकल्ड PET रेज़िन मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के लिए बहुत अहम है। यह प्लांट 2028 में शुरू होने वाला है और इस तरह के एडवांस में मिले कमिटमेंट कंपनी के प्रोजेक्ट को मजबूत करते हैं। साथ ही, यह ग्लोबल ब्रांड्स द्वारा सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने की बढ़ती पहल के बीच भविष्य की बिक्री के लिए एक विजिबिलिटी भी प्रदान करता है।
प्रोजेक्ट की कहानी
Ester Industries, जो पॉलिएस्टर फिल्म्स, स्पेशियलिटी पॉलिमर्स और पॉलिएस्टर रेज़िन बनाती है, ने Loop Industries के साथ मिलकर भारत में यह फैसिलिटी स्थापित करने के लिए एक जॉइंट वेंचर बनाया है। इसका मकसद Loop Industries की एडवांस्ड रीसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके टिकाऊ, रीसाइकल्ड PET रेज़िन का उत्पादन करना है।
आगे क्या?
इस प्रोजेक्ट में इंजीनियरिंग का काम Tata Consulting Engineers द्वारा पूरा कर लिया गया है और Toyo Engineering India Private Limited को डिटेल्ड इंजीनियरिंग कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है। अगले 2-3 महीनों में जमीन अधिग्रहण का काम पूरा होने की उम्मीद है, जिसके बाद निर्माण शुरू होगा और प्लांट 2028 तक ऑपरेशनल हो जाएगा।
जोखिम पर नजर
सबसे बड़ा जोखिम यह है कि यह LOI नॉन-बाइंडिंग है, यानी यह अभी तक कोई कानूनी रूप से बाध्यकारी कॉन्ट्रैक्ट नहीं है। इसलिए, इन LOIs को भविष्य में पक्के, लीगल सप्लाई एग्रीमेंट में बदलना इस प्रोजेक्ट की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगा।
कंपनी की क्षमता
Ester Industries अकेले पॉलिएस्टर रेज़िन की 67,000 TPA, स्पेशियलिटी पॉलिमर्स की 30,000 TPA और पॉलिएस्टर फिल्म की 1,08,000 TPA क्षमता रखती है।
आगे क्या ट्रैक करें?
निवेशकों को यह देखना होगा कि ये नॉन-बाइंडिंग LOIs कब तक पक्के कॉन्ट्रैक्ट्स में बदलते हैं। इसके अलावा, जमीन अधिग्रहण और कंस्ट्रक्शन की प्रगति पर भी नजर रखनी होगी।
