दीपक फर्टिलिसर्स के नतीजे: एक नज़र
Deepak Fertilisers & Petrochemicals Corporation Ltd. ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त चौथी तिमाही (Q4 FY26) और पूरे वित्त वर्ष के नतीजों का ऐलान किया है। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू Q4 FY26 में 12.9% बढ़कर ₹3,011.38 करोड़ हो गया, जो कि पिछले साल की समान तिमाही में ₹2,667.35 करोड़ था। लेकिन, इनपुट लागत बढ़ने और मार्जिन पर दबाव के चलते कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में 49.8% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। यह ₹277.86 करोड़ से घटकर ₹139.39 करोड़ पर आ गया।
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए, कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹11,506.03 करोड़ रहा, जबकि नेट प्रॉफिट ₹738.76 करोड़ दर्ज किया गया।
क्यों आई मुनाफे में गिरावट?
कंपनी ने कहा है कि इनपुट लागतों में वृद्धि और मार्जिन की चुनौतियों के कारण तिमाही मुनाफे में गिरावट आई है। हालांकि, रेवेन्यू में बढ़ोतरी के बावजूद, कम मुनाफे से प्रति शेयर आय (Earnings Per Share) और कंपनी के अल्पकालिक वित्तीय स्वास्थ्य पर असर पड़ा है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
इस नतीजों के बीच, कंपनी ने ₹10 प्रति शेयर (यानी 100%) के डिविडेंड का ऐलान किया है। यह शेयरधारकों को रिटर्न देने की कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके अलावा, कंपनी ने अपने स्टैच्यूटरी और कॉस्ट ऑडिटर की नियुक्ति को भी मंजूरी दे दी है, साथ ही मिस्टर यशिल एस. मेहता को अतिरिक्त निदेशक (Additional Director) के तौर पर नियुक्त किया है।
भविष्य की योजनाएं और जोखिम
Deepak Fertilisers माइनिंग केमिकल्स (TAN) और इंडस्ट्रियल केमिकल्स सेगमेंट में विस्तार पर जोर दे रही है। कंपनी अपने बड़े कैपेक्स प्रोजेक्ट्स को Q2 FY27 तक चालू करने की योजना बना रही है, जिसमें गोपालपुर में TAN प्रोजेक्ट (₹2,675 करोड़ का निवेश) और दहेज में नाइट्रिक एसिड प्रोजेक्ट (₹1,983 करोड़ का निवेश) शामिल हैं।
हालांकि, Q4 में मुनाफे में आई भारी गिरावट एक चिंता का विषय है। वहीं, 2026 के लिए सामान्य से कम मॉनसून का अनुमान (92% of LPA) क्रॉप न्यूट्रिशन बिजनेस के लिए मांग का जोखिम पैदा कर सकता है। कंपनी पर ₹96.04 करोड़ के एक पुराने टैक्स जुर्माने की अपील का मामला भी चल रहा है।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को कंपनी के कैपेक्स प्रोजेक्ट्स की प्रगति, मॉनसून का फर्टिलाइजर बिजनेस पर असर और टैक्स मुकदमे के समाधान पर बारीकी से नजर रखनी होगी। साथ ही, कंपनी की कच्ची माल की बढ़ती लागतों को ग्राहकों पर डालने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी।
