DCM Shriram Ltd ने झगाड़िया स्थित अपनी यूनिट में नए एल्युमीनियम क्लोराइड और कैल्शियम क्लोराइड प्लांट शुरू कर दिए हैं। इस विस्तार से कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में बड़ा इजाफा हुआ है और कच्चे माल का इस्तेमाल और बेहतर होगा।
क्षमता में हुआ बड़ा इजाफा
कंपनी ने अपने झगाड़िया प्लांट में 100 TPD का नया एल्युमीनियम क्लोराइड प्लांट चालू किया है, जिससे इसकी कुल क्षमता बढ़कर 250 TPD हो गई है। इसके साथ ही, कैल्शियम क्लोराइड की पहली प्रोडक्शन लाइन भी शुरू कर दी गई है, जो 133 TPD की क्षमता जोड़ेगी। कंपनी के अनुसार, नए कैल्शियम क्लोराइड प्रोडक्ट को बाजार से शुरुआती सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।
क्यों है यह स्ट्रैटेजिक फैसला?
यह विस्तार कंपनी की वर्टिकल इंटीग्रेशन रणनीति का हिस्सा है। अब DCM Shriram अपने क्लोरिन और हाइड्रोक्लोरिक एसिड का बेहतर इस्तेमाल कर पाएगी। एल्युमीनियम क्लोराइड प्लांट सीधे तौर पर क्लोरिन की खपत करेगा, जबकि कैल्शियम क्लोराइड प्लांट हाइड्रोक्लोरिक एसिड का उपयोग करेगा। इससे कंपनी की बाहरी मांग पर निर्भरता घटेगी और वैल्यु-एडेड प्रोडक्ट्स के जरिए मुनाफे में इजाफा होने की उम्मीद है।
आगे क्या है जोखिम और टारगेट?
निवेशकों को अब इन प्लांट के प्रोडक्शन रैंप-अप पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि क्षमता बढ़ने का सीधा असर प्रॉफिटेबिलिटी पर दिखने में समय लगता है। साथ ही, कंपनी ने अक्टूबर 2026 में कैल्शियम क्लोराइड की दूसरी 133 TPD की लाइन शुरू करने का लक्ष्य रखा है। किसी भी तरह की देरी कंपनी के रेवेन्यू ग्रोथ को प्रभावित कर सकती है। आगामी तिमाही नतीजों में इन नए प्रोडक्ट्स का मार्जिन पर असर देखना दिलचस्प होगा।
