Clean Science and Technology ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में **₹295 करोड़** का रिकॉर्ड कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दर्ज किया है, जो साल-दर-साल **12%** अधिक है। हालांकि, HALS सेगमेंट में दमदार ग्रोथ के बावजूद कंपनी मार्जिन के दबाव से जूझ रही है।
मुनाफे का गणित और चुनौतियां
कंपनी का नेट प्रॉफिट (PAT) इस तिमाही में ₹56 करोड़ रहा। कंपनी की टॉप-लाइन में बढ़ोतरी की मुख्य वजह HALS सेगमेंट में वॉल्यूम ग्रोथ रही, जहां रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले दोगुना हो गया है। लेकिन दूसरी तरफ, फिनोल (phenol), एसीटोन (acetone) और मेथनॉल (methanol) जैसे कच्चे माल की कीमतों में 50% से 100% तक का उछाल आया है, जिसने कंपनी की कमर तोड़ दी है।
क्यों दबाव में है मार्जिन?
मार्केट में चीनी उत्पादकों की आक्रामक प्राइसिंग के कारण कंपनी के पास अपनी कीमतें बढ़ाने की गुंजाइश नहीं है। इसका सीधा असर EBITDA और PAT मार्जिन पर दिखा है। यही कारण है कि कंपनी ने बारबिट्यूरिक एसिड (Barbituric Acid) प्रोजेक्ट को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
आगे की रणनीति और कैपेक्स
कॉस्ट कॉम्पिटिटिवनेस को सुधारने के लिए मैनेजमेंट 'बैकवर्ड इंटीग्रेशन' पर जोर दे रहा है। इससे कुछ खास सेगमेंट में मार्जिन में 5% से 7% तक का सुधार आने की उम्मीद है। कंपनी ने Q2 में अपनी सब्सिडियरी में ₹50 करोड़ का निवेश किया है, जिससे छमाही कैपेक्स ₹150 करोड़ पहुंच गया है। कंपनी अपनी HALS क्षमता को बढ़ाकर 12,500 टन करने की तैयारी में है।
निवेशकों के लिए अहम आंकड़े
- कच्चे माल की लागत: रेवेन्यू का 43.3% हो गया, जो पहले 39.7% था।
- HALS कैपेसिटी यूटिलाइजेशन: वर्तमान में 30-40% है, जिसे बढ़ाकर 55-60% करने का लक्ष्य है।
