Anupam Rasayan India की प्रमोटर मोना आनंदभाई देसाई ने अपने कुल होल्डिंग के **97.58%** शेयर गिरवी रख दिए हैं। ये शेयर **40,40,625** की संख्या में हैं, जिन्हें ग्रुप की अन्य कंपनियों के कर्ज को सुरक्षित करने के लिए गिरवी रखा गया है।
क्या है मामला?
प्रमोटर मोना आनंदभाई देसाई ने 23 सितंबर से 30 सितंबर, 2026 के बीच शेयर गिरवी रखने और उन्हें छुड़ाने की एक प्रक्रिया पूरी की है। अब उनके पास मौजूद कुल शेयरों का 97.58% हिस्सा 'Catalyst Trusteeship Limited' के पास गिरवी है। यह कदम ग्रुप की दो कंपनियों, 'Mates Visa Consultancy' और 'Rehash Industrial and Resins Chemicals', द्वारा जारी नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) को सुरक्षित करने के लिए उठाया गया है।
कर्ज का गणित और इस्तेमाल
ग्रुप ने कुल ₹578 करोड़ का कर्ज जुटाया है। इसका उपयोग मुख्य रूप से दो बड़े कामों के लिए किया जा रहा है:
- Bliss GVS Pharma के अधिग्रहण के लिए 'Mates Visa' ने ₹300 करोड़ जुटाए हैं, जिसे 48 महीने में चुकाना है।
- 'Rehash Industrial' ने पुराने प्रमोटर कर्ज को चुकाने के लिए ₹278 करोड़ लिए हैं, जिसके लिए 36 महीने का समय तय किया गया है।
निवेशकों के लिए जोखिम
शेयर बाजार में प्रमोटर की हिस्सेदारी गिरवी रखना हमेशा एक संवेदनशील मुद्दा माना जाता है। चूंकि प्रमोटर ने अपनी लगभग पूरी हिस्सेदारी गिरवी रख दी है, इसलिए निवेशकों को अब इन ग्रुप कंपनियों की रीपेमेंट क्षमता पर नजर रखनी होगी। यदि ये कंपनियां तय समय पर ब्याज या मूलधन चुकाने में असफल रहती हैं, तो गिरवी रखे गए शेयरों का लिक्विडेशन बाजार में हलचल पैदा कर सकता है।
फिलहाल, निवेशकों को प्रमोटर की भविष्य की डिस्क्लोजर्स और एनपीए (NPA) या रीपेमेंट से जुड़ी किसी भी अपडेट पर सतर्क नजर रखनी चाहिए।
