Andhra Petrochemicals ने FY26 के लिए कमजोर नतीजे जारी किए हैं। मार्केट में चुनौतियों और कच्चे माल की किल्लत के चलते कंपनी को **₹15.63 करोड़** का नेट लॉस हुआ है, जिसके बाद प्लांट का कामकाज भी ठप पड़ा है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और आंकड़े
कंपनी के लिए यह साल चुनौतियों से भरा रहा। जहां पिछले फाइनेंशियल ईयर में कंपनी को ₹18.13 करोड़ का घाटा हुआ था, वहीं इस साल यह मामूली सुधार के साथ ₹15.63 करोड़ रहा है। कंपनी की नेट सेल्स भी गिरकर ₹455.80 करोड़ पर आ गई है, जो पिछले साल ₹501.89 करोड़ थी। इसके अलावा, ऑक्सो-अल्कोहल का प्रोडक्शन भी 47,844 MT तक सिमट गया है, जो पहले 51,489 MT था।
ऑपरेशंस क्यों ठप हैं?
कंपनी के लिए सबसे बड़ी मुसीबत 17 मार्च, 2026 से शुरू हुई जब हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) से प्रोपलीन (Propylene) की सप्लाई रुक गई। इस कारण कंपनी को अपने प्लांट का कामकाज बंद करना पड़ा। मैनेजमेंट का कहना है कि काम तभी शुरू होगा जब कच्चे माल की सप्लाई फिर से बहाल होगी।
मार्केट और रेटिंग का दबाव
चीन में बढ़ती कैपेसिटी और सस्ते इंपोर्ट के चलते ऑक्सो-अल्कोहल की कीमतें दबाव में हैं, जिसका सीधा असर कंपनी की कमाई पर पड़ा है। इसी कारण बोर्ड ने इस बार कोई डिविडेंड नहीं देने का फैसला किया है। इसके अलावा, ICRA ने कंपनी की लॉन्ग-टर्म क्रेडिट रेटिंग को घटाकर [ICRA]BBB+ कर दिया है और आउटलुक को 'Negative' रखा है। वैकल्पिक सप्लायर्स के रूप में GAIL और BPCL का नाम तो है, लेकिन भारी लॉजिस्टिक्स लागत की वजह से उन्हें चुनना फिलहाल कंपनी के लिए संभव नहीं है।
