Acutaas Chemicals ने साउथ कोरिया में अपनी नई सेमीकंडक्टर मैटेरियल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू कर दी है। कंपनी ने अपनी सब्सिडियरी Indichem Inc. के जरिए इसमें **₹200 करोड़** का निवेश किया है, जो ग्लोबल चिप मार्केट में कंपनी की धाक जमाएगा।
क्या है 'टू-कंट्री मॉडल'?
कंपनी ने ग्लोबल लेवल पर मुकाबला करने के लिए एक यूनिक 'टू-कंट्री मॉडल' पेश किया है। इसके तहत, केमिकल सिंथेसिस का शुरुआती काम भारत में होगा और फिर इसे साउथ कोरिया भेजा जाएगा। वहां Indichem Inc. के जरिए हाई-प्योरिटी रिफाइनिंग और टेस्टिंग का काम पूरा किया जाएगा। इस स्ट्रैटेजी का मकसद भारतीय कॉस्ट एफिशिएंसी और कोरियन टेक्निकल एक्सपर्टीज का तालमेल बिठाना है।
निवेश और हिस्सेदारी (Investment Details)
इस प्रोजेक्ट के लिए कुल KRW 30 बिलियन का निवेश किया गया है। Indichem Inc. में Acutaas Chemicals की सब्सिडियरी, Acutaas Advance Material Limited (AAML) की 75% हिस्सेदारी है, जबकि बाकी 25% शेयर साउथ कोरियन पार्टनर J & Materials Co. Ltd के पास हैं। गौर करने वाली बात यह है कि इस प्लांट को मात्र 11 महीने के रिकॉर्ड समय में तैयार किया गया है।
रिस्क और आगे की राह
भविष्य में इस निवेश का फायदा कंपनी के मार्जिन पर कैसा पड़ेगा, यह देखना दिलचस्प होगा। इसके अलावा, इंटरनेशनल ट्रेड रेगुलेशन और करेंसी वोलैटिलिटी (Rupee vs Won) जैसे रिस्क भी बिजनेस पर असर डाल सकते हैं। निवेशकों को अब कंपनी के प्रोडक्शन कैपेसिटी और ग्लोबल चिप मैन्युफैक्चरर्स से मिलने वाले ऑर्डर्स पर नजर रखनी होगी।
