दवा कंपनी Lupin के सितंबर तिमाही के नतीजे कमजोर रहे हैं। कंपनी का एडजस्टेड प्रॉफिट सालाना आधार पर **22.2%** घटकर **₹1,155 करोड़** रहा है। अमेरिकी बाजार में कीमतों के दबाव और मार्जिन में कटौती के चलते नतीजों पर असर पड़ा है।
मुनाफे में क्यों आई सुस्ती?
Lupin के लिए चालू फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही चुनौतीपूर्ण रही। कंपनी का नेट सेल्स ₹7,827 करोड़ रहा, जो सालाना आधार पर 11.1% बढ़ा है, लेकिन तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 5.4% की गिरावट देखी गई है। मार्जिन की बात करें तो EBITDA 12.7% गिरकर ₹2,044 करोड़ पर आ गया है, और मार्जिन 710 बेसिस पॉइंट्स घटकर 26.1% रह गया है।
अमेरिकी बाजार में चुनौती
कंपनी की कमाई पर असर डालने वाली सबसे बड़ी वजह अमेरिका से आने वाला रेवेन्यू है, जो तिमाही आधार पर 13% गिरकर US$317 मिलियन रहा है। Tolvaptan और Mirabegron जैसे प्रमुख प्रोडक्ट्स की कीमतों में भारी गिरावट (Pricing Erosion) ने मुनाफे को प्रभावित किया है। राहत की बात यह है कि घरेलू बिजनेस में 13.8% की सालाना ग्रोथ देखी गई है।
ब्रोकरेज की राय और आगे की राह
Axis Securities ने स्टॉक पर 'HOLD' रेटिंग बनाए रखी है और इसका टारगेट प्राइस ₹2,180 तय किया है। अब निवेशकों की नजर कंपनी के कॉम्प्लेक्स पाइपलाइन पर टिकी है। Lupin अगले तीन सालों में अमेरिका में 60 से अधिक प्रोडक्ट्स लॉन्च करने की तैयारी कर रही है, जिसमें रेस्पिरेटरी और इंजेक्टेबल एसेट्स शामिल हैं।
क्या है रिस्क?
निवेशकों को USFDA की सख्ती पर नजर रखनी होगी, क्योंकि किसी भी प्रतिकूल निरीक्षण (Unfavorable Inspection) से कंपनी के ग्रोथ प्लान में रुकावट आ सकती है। इसके अलावा, US जेनरिक मार्केट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा मार्जिन के लिए बड़ा जोखिम बनी हुई है। मैनेजमेंट ने अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए कम से कम US$1 बिलियन का रेवेन्यू टारगेट रखा है, जिस पर निवेशकों की पैनी नजर होनी चाहिए।
