ब्रोकरेज फर्म Axis Securities ने Company Name को 'HOLD' से 'BUY' रेटिंग दी है, और टारगेट प्राइस ₹335 पर बरकरार रखा है। कंपनी ने Q1FY27 के नतीजे अनुमानों से बेहतर पेश किए हैं। मजबूत ऑर्डर बुक से भविष्य में ग्रोथ की उम्मीद है, लेकिन मार्जिन पर दबाव एक अहम चिंता का विषय है।
Axis Securities का बड़ा दांव!
ब्रोकरेज फर्म Axis Securities ने Company Name के शेयर पर अपना भरोसा जताते हुए 'HOLD' से 'BUY' रेटिंग दी है। साथ ही, शेयर का टारगेट प्राइस ₹335 पर बरकरार रखा है। कंपनी ने Q1FY27 में दमदार परफॉरमेंस दिखाते हुए रेवेन्यू, EBITDA और PAT के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है।
नतीजों ने चौंकाया
Company Name ने Q1FY27 के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का नेट सेल्स ₹1,365 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 45% ज्यादा है। EBITDA 30% बढ़कर ₹260 करोड़ दर्ज किया गया, जिससे EBITDA मार्जिन 19.1% रहा। वहीं, PAT में 27% की बढ़ोतरी के साथ यह ₹163 करोड़ पर पहुंचा। ये आंकड़े Axis Securities के अनुमानों से रेवेन्यू में 11%, EBITDA में 18% और PAT में 20% ज्यादा हैं।
क्यों है यह अहम?
Q1 की शानदार परफॉरमेंस कंपनी के मजबूत ऑपरेशनल एग्जीक्यूशन और सर्विसेज की बढ़ती मांग को दर्शाती है। 30 जून 2026 तक ₹24,020 करोड़ की विशाल ऑर्डर बुक आने वाली तिमाहियों के लिए अच्छी रेवेन्यू विजिबिलिटी दे रही है। RDSS स्कीम के तहत स्मार्ट मीटर का रोलआउट कंपनी के लिए एक बड़ा ग्रोथ इंजन बना हुआ है।
कंपनी की पिछली स्थिति
30 जून 2026 तक, Company Name की एग्जीक्यूटेबल ऑर्डर बुक (टैक्स छोड़कर) ₹24,020 करोड़ थी, जिसमें से ₹22,183 करोड़ का हिस्सा इसके JV/GIC प्लेटफॉर्म Gemstar Infra Pte Ltd से था। राष्ट्रीय स्मार्ट मीटर योजना (RDSS) के तहत 20.3 करोड़ मीटर स्वीकृत और 12.9 करोड़ अवार्ड किए जा चुके हैं, जिनमें डिलीवरी और इंस्टॉलेशन का काम तेजी से चल रहा है।
अब क्या बदलेगा?
Axis Securities का 'BUY' रेटिंग देना कंपनी की ग्रोथ की संभावनाओं में विश्वास दिखाता है, जो मजबूत एग्जीक्यूशन और स्वस्थ ऑर्डर पाइपलाइन से संचालित होगी। हालांकि, टारगेट प्राइस का वही रहना यह संकेत देता है कि मौजूदा मार्केट कंडीशंस और कंपनी-विशिष्ट फैक्टर्स को पहले से ही ध्यान में रखा गया है।
जोखिम पर नजर
कंपनी के मैनेजमेंट ने FY27 के लिए EBITDA मार्जिन गाइडेंस को लगभग 20% से घटाकर लगभग 18% कर दिया है। इसका मुख्य कारण कमोडिटी की महंगाई, चिप्स की बढ़ती कीमतें और INR का कमजोर होना है। वर्तमान ऑर्डर बुक का लगभग 45-50% हिस्सा कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी के प्रति संवेदनशील है, और इसके लिए मूल्य वृद्धि का सीधा लाभ कंपनी को नहीं मिलेगा, जिससे प्रॉफिटेबिलिटी पर असर पड़ सकता है।
आगे क्या देखना है?
निवेशकों को अगले नतीजों में कंपनी द्वारा कच्चे माल की लागत के दबाव को मैनेज करने और EBITDA मार्जिन पर इसके प्रभाव पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। बड़ी ऑर्डर बुक पर एग्जीक्यूशन की गति और स्मार्ट मीटर रोलआउट में प्रगति भी महत्वपूर्ण होगी।
