एक ब्रोकरेज फर्म ने कंपनी पर अपना 'BUY' रेटिंग बरकरार रखा है और टारगेट प्राइस को बढ़ाकर **₹6,615** कर दिया है। हालांकि कंपनी का रेवेन्यू **20%** बढ़ा है, लेकिन एक्विजिशन लागत और बढ़ते खर्चों के कारण नेट प्रॉफिट **₹352 करोड़** पर आ गया है।
मुनाफे में गिरावट, लेकिन भविष्य पर दांव
Q2FY27 में कंपनी का रेवेन्यू US$487.6 मिलियन (20% YoY बढ़त) रहा, जबकि नेट प्रॉफिट 25.4% गिरकर ₹352 करोड़ दर्ज किया गया। नेट सेल्स 30.3% उछलकर ₹4,664 करोड़ रही।
क्यों दबाव में है कंपनी?
मुनाफे में कमी के पीछे अस्थायी कारण हैं जैसे:
- एक्विजिशन से जुड़ी लागतें।
- वेज हाइक (वेतन वृद्धि) का 180 bps का असर।
- रिसोर्स यूटिलाइजेशन में कमी।
कंपनी Nagarro के 94.04% शेयर हासिल कर चुकी है और इस डील के लिए US$450 मिलियन जुटाने की योजना है, जिसके लिए QIP या FCCBs का रास्ता अपनाया जा सकता है।
मैनेजमेंट का विजन और गोल्स
मार्जिन पर दबाव के बावजूद, मैनेजमेंट का लक्ष्य 16-17% का मार्जिन बनाए रखना है। कंपनी का FY27 तक $2 बिलियन और FY31 तक $5 बिलियन का रेवेन्यू टारगेट है, जिसमें AI-आधारित कॉन्ट्रैक्ट्स और मैन्युफैक्चरिंग वर्टिकल की बड़ी भूमिका होगी।
निवेशकों के लिए जोखिम
Nagarro के साथ इंटीग्रेशन रिस्क और मार्जिन वोलैटिलिटी (Volatility) अभी भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय हो सकते हैं। सबकॉन्ट्रैक्टिंग खर्च और करेंसी फ्लक्चुएशन मार्जिन को और प्रभावित कर सकते हैं।
