IRDAI के नए कंसल्टेशन पेपर ने मार्केट में हलचल मचा दी है। Axis Securities के अनुसार, डिस्ट्रीब्यूशन और एक्सपेंस मैनेजमेंट में बदलाव से बैंकों और NBFCs की कमाई पर दबाव पड़ सकता है।
ड्राफ्ट का मुख्य केंद्र
रेगुलेटर IRDAI ने इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन इकोनॉमिक्स में बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया है। इसका सीधा असर कंपनी के खर्च प्रबंधन (Expense Management) और कमीशन कैप्स पर पड़ेगा।
क्या हैं मुख्य बदलाव?
Axis Securities की रिपोर्ट के मुताबिक, IRDAI साल 2023 के एक्सपेंस ऑफ मैनेजमेंट (EoM) रिफॉर्म्स को फिर से देख रहा है। प्रस्तावों के तहत:
- कमीशन कैप: एजेंटों और इंस्टीट्यूशनल डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए कमीशन की सीमा तय की जाएगी।
- EoM टारगेट: लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों को 2 साल में EoM को 15% और 5 साल में 12.5% तक लाना होगा।
- जनरल और हेल्थ इंश्योरेंस: इन्हें 5 साल के भीतर 20% के टारगेट तक पहुंचना होगा।
बैंकों और NBFCs पर असर
रेगुलेशन का सबसे बड़ा प्रभाव लोन-इंश्योरेंस बंडलिंग पर प्रतिबंध से होगा। अब बैंकों और NBFCs के लिए लोन के साथ इंश्योरेंस बेचना अनिवार्य नहीं होगा। इससे उन वित्तीय संस्थानों की 'फी-बेस्ड इनकम' पर सीधा असर पड़ सकता है, जो अब तक इस मॉडल पर निर्भर थे। इसके अलावा, जिन कंपनियों की रेवेन्यू ₹500 मिलियन से अधिक है, उनके लिए एनुअल कॉस्ट ऑडिट अनिवार्य कर दिया जाएगा।
आगे की राह
फिलहाल यह सिर्फ एक ड्राफ्ट है और बाजार के जानकारों का मानना है कि अंतिम नियम थोड़े लचीले हो सकते हैं। निवेशकों को अब इस पर नजर रखनी चाहिए कि बैंकों के PPoP (Pre-Provision Operating Profit) पर इसका कितना असर पड़ता है, खासकर उन बैंकों पर जिनकी bancassurance पार्टनरशिप बहुत मजबूत है।
