Yes Bank के लिए अच्छी खबर आई है। कंपनी को टैक्स लिटिगेशन (Tax Litigation) मामले में बड़ी जीत मिली है, जिसके बाद उसे ₹879 करोड़ का इनकम टैक्स रिफंड (Income Tax Refund) मिलेगा।
Yes Bank को ₹879 करोड़ का टैक्स रिफंड मिला
Yes Bank ने टैक्स से जुड़े एक पुराने मामले को सफलतापूर्वक सुलझा लिया है। असेसमेंट ईयर (Assessment Year) 2018-19 के लिए हुए इस टैक्स लिटिगेशन में बैंक के पक्ष में फैसला आया है, जिसके बाद उसे ₹879 करोड़ का इनकम टैक्स रिफंड (Income Tax Refund) मिलेगा। यह बैंक के लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि इससे पहले मार्च 2024 में इस मामले में ₹112.81 करोड़ की टैक्स डिमांड (Tax Demand) निकली थी।
यह रिफंड क्यों महत्वपूर्ण है?
यह रिफंड लगभग ₹879 करोड़ का है, जो कि SEBI द्वारा तय की गई ₹120 करोड़ की मटेरियल डिस्क्लोजर लिमिट (Material Disclosure Limit) से काफी ज्यादा है। यह इस बात का संकेत है कि बैंक ने एक बड़े पुराने टैक्स डिस्प्यूट (Tax Dispute) को सफलतापूर्वक हल कर लिया है। इससे बैंक की फाइनेंशियल पोजीशन (Financial Position) मजबूत होगी और यह उसकी लिक्विडिटी (Liquidity) को भी बढ़ाएगा।
पूरा मामला क्या था?
मार्च 2024 में, री-असेसमेंट प्रोसीडिंग्स (Re-assessment Proceedings) के बाद Yes Bank पर ₹112.81 करोड़ का अतिरिक्त टैक्स डिमांड निकाला गया था। बैंक ने इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी। इसके बाद, 27 अक्टूबर 2025 और 30 दिसंबर 2025 को अपीलेट अथॉरिटी (Appellate Authority) ने बैंक के पक्ष में फैसला सुनाया। अब, ज्यूरिस्डिक्शनल असेसिंग ऑफिसर (Jurisdictional Assessing Officer) ने ₹879 करोड़ के रिफंड का आदेश जारी किया है।
अब आगे क्या?
यह ₹879 करोड़ का रिफंड, जिसमें मूल टैक्स, ब्याज और संबंधित टैक्स बेनिफिट्स शामिल हैं, Yes Bank के खाते में जमा किए जाएंगे। इससे पहले निकाली गई टैक्स डिमांड पूरी तरह से खत्म हो गई है और बैंक की लिक्विडिटी की स्थिति पहले से बेहतर हो गई है।
आगे क्या देखना होगा?
हालांकि यह एक बड़ी सकारात्मक खबर है, लेकिन वित्तीय संस्थानों के लिए टैक्स लिटिगेशन का बार-बार होना एक जोखिम बना रहता है। निवेशकों को इस मामले में आगे के किसी भी डेवलपमेंट पर नजर रखनी चाहिए।
